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पर्युषण 4 से, होगी विशेष धर्माराधना

11 को संवत्सरी व 12 को क्षमापना पर्व
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भीलवाड़ा

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Suresh Jain

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Updated: 28 Aug 2021, 8:34 AM IST

पर्युषण 4 से, होगी विशेष धर्माराधना

पर्युषण 4 से, होगी विशेष धर्माराधना

भीलवाड़ा।
पर्युषण जैन धर्म में खास अहमियत रखता है। चातुर्मास के दौरान पर्युषण काल में विशेष रूप से धर्माराधना की जाती है। पर्युषण में श्रावक समाज भी अन्य सामाजिक, व्यापारिक प्रवृत्तियों से निवृत्ति लेकर ध्यान, जप, सामायिक, तप आदि के माध्यम से अध्यात्म की साधना करते है। आदित्य विहार में तेरापंथ धर्मसंघ के 11वें आचार्य महाश्रमण के सान्निध्य में 4 सितंबर से नवाह्निक पर्युषण पर्व मनाया जाएगा। प्रत्येक दिन विशेष विषय पर आधारित होगा। 11 सितंबर को संवत्सरी व 12 सितंबर को क्षमापना पर्व के साथ पर्युषण का समापन होगा।
यह होगा कार्यक्रम
4 सितंबर: खाद्य संयम दिवस-पर्युषण का प्रथम दिवस। आत्मा की आराधना का पर्व। आत्मा की आराधना के लिए शरीर को साधना जरूरी। शरीर को साधने के लिए भोजन का संयम जरूरी है। प्रारंभ में ही खाद्य संयम की प्रेरणा दी जाती है।
5 सितंबर : स्वाध्याय दिवस-आत्मा की आराधना के लिए ज्ञान की आवश्यकता है। स्वाध्याय के द्वारा ज्ञान की प्राप्ति की जाती है। यह दिवस स्वाध्याय को समर्पित है।
6 सितंबर : सामायिक दिवस-48 मिनट तक आत्मा में लीन रहने का उपक्रम है सामायिक। जैन धर्म में धर्मोपासना की श्रावकों के लिए यह एक महत्वपूर्ण क्रिया है। जिसमें निर्धारित समय तक साधु की तरह जीवन जीया जाता है।
7 सितंबर: वाणी संयम दिवस-वाणी अभिव्यक्ति का माध्यम होती है। मधुर वचन दिलों को मिलाते हैं, वहीं कटु वचन विनाश को न्योता देते हैं। पर्युषण का चतुर्थ दिवस विवेकपूर्वक वचन के उपयोग की प्रेरणा देता है।
8 सितंबर: अणुव्रत चेतना दिवस: अणुव्रत प्रवर्तक आचार्य तुलसी द्वारा प्रवर्तित अणुव्रत सम्प्रदायातीत आंदोलन है, जो स्वस्थ समाज संरचना का महत्वपूर्ण उपक्रम है। छोटे-छोटे व्रतों द्वारा जीवन शैली उज्ज्वल की जाती है। श्रावक के 12 व्रतों की प्रेरणा इस दिन दी जाती है।
9 सितंबर: जप दिवस- मंत्र, स्तोत्रों के जप द्वारा अपने इष्ट से तादात्म्य स्थापित किया जाता है। कर्म निर्जरा का भी जप एक महत्वपूर्ण माध्यम है।
10 सितंबर : ध्यान दिवस-स्वयं के द्वारा स्वयं को देखना ध्यान है। मन, वचन, काया को साधकर इंद्रियों का संयमन करना ध्यान है।
11 सितंबर: संवत्सरी महापर्व-जैन धर्म में संवत्सरी आत्म साधना का महान पर्व है। इस पर साधु-साध्वियां अनिवार्य रूप से चोविहार उपवास रखते हैं।इसमें 36 घंटे पानी नहीं पीते। इस दिन उपवास कर पौषध आदि द्वारा विशेष रूप से धार्मिक आराधना करते हैं।
12 सितंबर : क्षमापना दिवस- दिल से द्वेष-कटुता मिटाकर सरल मन से क्षमा करना व क्षमा मांगना विरल कार्य है। क्षमापना दिवस पर सभी आपस में खमतखामना कर पूर्व कटुता भुलाकर मैत्री भावना भाते हैं। आचार्य के सान्निध्य में पर्युषण महापर्व का वर्चुअल होगा।