क्षेत्र के प्रबुद्धजनों के अनुसार मान्यता है कि नवरात्र में यहां मां घाटारानी खुद विराजित होती है। उन्हें किसी प्रकार से व्यवधान ना हो, इसलिए नवरात्र में अष्टमी तक गर्भ गृह के पट बंद रखते हैं। जहाजपुर कस्बे से 10 किमी दूर दक्षिण दिशा में मां घाटारानी का मंदिर है, जहां दोनों नवरात्र में हर अमावस्या पर घट स्थापना होने के साथ ही मंदिर के पट बंद हो जाते हैं। ये अष्टमी पर पूजा-अर्चना के बाद ही खोले जाते हैं। दर्शन तभी पूर्ण माने जाते हैं, जब श्रद्धालु पहाड़ी व नदी किनारे स्थित मंदिर के दर्शन करते हैं।