किसानो ने बताया कि तुलाई के लिए पल्लेदार भी नहीं है। इस प्रकार सरकारी मूंग व उड़द खरीद केन्द्र 10 दिन बीत जाने के बाद भी अव्यवस्थाओं की उलझन से बाहर नहीं निकल पाया। राजफैड से टोकनधारी किसानों के पास मोबाइल पर जब तुलाई का मैसेज आता है तब उसे पढ़कर चेहरे पर खुशी छा जाती है लेकिन अगले दिन जब वह किसान फसल लेकर या पूछताछ करने जाता है तब उसकी प्रसन्नता जिम्मेदारों से यह सुनकर काफूर हो जाती है कि बारदाना व पल्लेदार नहीं है, बाद में आना। किसान जब पूछता है कि कब आना है तो जबाव मिलता है कि हम फोन कर देंगे।
अव्यवस्थाओं के कारण 25 में से एक किसान भी नहीं पहुंचा