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सरकारी फुल, निजी में महंगा इलाज कराने को मजूबर

कोरोना को लेकर किसी को नहीं मिल रहा पलंग
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भीलवाड़ा

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Suresh Jain

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Updated: 26 Apr 2021, 9:54 AM IST

सरकारी फुल, निजी में महंगा इलाज कराने को मजूबर

सरकारी फुल, निजी में महंगा इलाज कराने को मजूबर

सुरेश जैन
भीलवाड़ा।
कोरोना महामारी ने लोगों की हालत खराब कर दी है। पिछले एक पखवाड़े में बड़ी संख्या में मरीज आने से जहां सरकारी अस्पताल में पलंग खाली नहीं है, वहीं निजी अस्पतालों में भी मारामारी मची हुई है। सरकारी में पलंग नहीं मिलने से लोगों को निजी अस्पतालों में महंगी दरों पर इलाज कराने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। निजी अस्पतालों में कोरोना मरीज का कम से कम पांच दिनों का इलाज खर्च ७० से एक लाख रुपए तक पड़ रहा है।
जिले के सबसे बड़े महात्मा गांधी अस्पताल में मरीज के भर्ती होने से डिस्चार्ज करने तक सब कुछ फ्री है। निजी अस्पताल में चिकित्सकीय सलाह, पलंग, वार्ड, दवा, जांच सबका शुल्क अदा करना पड़ रहा है। मरीज की स्थिति गंभीर होने पर वेंटीलेटर, आईसीयू का खर्च बढ़ जाता है। निजी अस्पतालों में भर्ती होने वाले मरीजों से विभिन्न जांचों और सेवा को लेकर सरकार ने राशि निर्धारित कर रखी है, लेकिन अस्पताल इससे अधिक राशि ले रहे है।
मजबूरी में जा रहे है
एक मरीज के परिजन ने बताया कि इन दिनों कोविड महामारी में एमजीएच में बहुत बुरे हालात है। सभी कोरोना के बेड भरे पड़े है। ३० मरीज वेन्टीलेटर पर चल रहे है। बढ़ते दबाव के कारण मरीज के परिजनों से स्टाफ का व्यवहार ठीक नहीं रहता है। वहां जल्दी से सुनवाई नहीं होती। ऐसे में मजबूरन निजी अस्पताल में जाना पड़ता है। निजी अस्पताल में रुपए लगते हैं लेकिन अन्य परेशानियां नहीं होती।
खर्च तो लेना ही पड़ेगा
एक निजी अस्पताल के प्रबंधक ने बताया कि सरकारी अस्पताल में मरीजों का सारा खर्च सरकार वहन करती है। वहां चिकित्सक, दवाएं, जांच आदि सब सरकार निशुल्क मुहैया कराती है। निजी अस्पतालों में सभी दवाएं बाजार से खरीद करनी पड़ती है। चिकित्सक, स्टॉफ और संसाधनों का खर्च स्वयं वहन करना पड़ता है। ऐसे में मरीजों से उन पर होने वाला खर्च ही लिया जा रहा है।
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केस एक
गंगापुर निवासी ६५ साल के कोरोना पॉजिटिव हुए। परिजनों ने शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। जहां पहले २५ हजार मांगे तथा दवाओं के हर दिन पांच हजार रुपए अलग लगे। ऑनलाइन व चेक से भुगतान नहीं लिया। डिस्चार्ज करते समय बिल थमाया जो कुल ७६ हजार ९०० रुपए का था।
केस दो
गंगापुर क्षेत्र के ही एक अन्य युवक कोरोना पॉजिटिव होने पर परिजनों ने निजी अस्पताल में भर्ती कराया। करीब सात दिन तक अस्पताल में रहना पड़ा। हालत में सुधार हुआ और अब घर भेज दिया है। यहां दस दिन का खर्च ९३ हजार रुपए रहा। यहां भी परिजनों को ९0 हजार रुपए जमा कराने पड़े। अस्पताल प्रबंधन ने तीन हजार रुपए की छूट दी।