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सुविधाओं के खजाने पर सरकारी ताला

भीलवाड़ा. जिले के बिजौलियां, कोटड़ी, समोड़ी, दरीबा आदि क्षेत्र से बड़ी मात्रा में चिनाई पत्थर, सैंड स्टोन, गारनेट, लैड जिंक, सीसा जस्त एवं मार्बल निकाला जा रहा है। यह खनन वैद्य और अवैद्य हो रहा है।
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भीलवाड़ा

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Suresh Jain

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Updated: 10 Aug 2022, 10:31 PM IST

सुविधाओं के खजाने पर सरकारी ताला

सुविधाओं के खजाने पर सरकारी ताला

भीलवाड़ा. जिले के बिजौलियां, कोटड़ी, समोड़ी, दरीबा आदि क्षेत्र से बड़ी मात्रा में चिनाई पत्थर, सैंड स्टोन, गारनेट, लैड जिंक, सीसा जस्त एवं मार्बल निकाला जा रहा है। यह खनन वैद्य और अवैद्य हो रहा है। अवैध खनन का दंश आसपास रहने वाले लोगों को झेलना पड़ रहा है। हालांकि सरकार ने खनन क्षेत्र के आसपास के बाशिंदों को मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने के लिए डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउण्डेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) फंड का गठन किया। इसमें 1300 करोड़ रुपए पड़े हैं, लेकिन वित्त विभाग की अनुमति के बिना इस राशि के उपयोग पर रोक है। लिहाजा खनन प्रभावित क्षेत्रों में लोग मूलभूत सुविधाओं से महरूम हैं।

प्रदेश में भीलवाड़ा खनिज प्रधान व अप्रधान जिलों में शामिल है, यहां लैड, जिंक,चांदी, सीसा, जस्ता, माइका, सैण्ड स्टोन. मार्बल, ग्रेनाइट, चेजा पत्थर सहित अन्य 21 तरह के खनिज बहुतायत में हैं। जिले में 2538 से ज्यादा वैध लीज हैं। इनमें 9 लैड, जिंक 1290 अप्रधान तथा 1239 क्वारी लाइसेंस है। इससे कई गुना अवैध खनन से प्रतिदिन हजारों टन खनिज निकाला जा रहा है। खनन के दौरान बारूद के विस्फोट एवं मिट्टी के कणों का प्रदूषण आसपास के लोगों में सिलिकोसिस, टीबी, सांस जैसी जटिल बीमारियां हो जाती है। जिले में कई खनन प्रभावित गांवों में सिलिकोसिस रोगियों की संख्या बढ़ रही है।
लीजधारकों से जुटाया जाता धन

खनन विभाग लीजधारकों से खनन के अनुपात में राशि लेता है, जो डीएमएफटी में जमा होती है। जिले में 9 जून 2016 से लागू योजना में सालाना औसतन 325 करोड़ जमा होते हैं। यह राज्य का 33 प्रतिशत हिस्सा है। पिछले छह साल से 1930 .95 करोड़ से अधिक राशि इस फंड में जमा हो चुकी है। इसमें 622.24 करोड़ के 2356 कार्यों को हरी झंडी मिल चुकी है। वर्तमान में जिले में करीब 1300 करोड़ की राशि डीएमएफटी में जमा है।
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खनन प्रभावित क्षेत्रों में करना होता है खर्च
डीएमएफटी फंड का उपयोग खनन प्रभावित क्षेत्रों में पेड़ लगाने, पानी व बेहतर चिकित्सा व्यवस्था, स्कूलों का विकास एवं शिक्षा आदि मूलभूत सुविधाओं के विस्तार पर करना होता है। खनन क्षेत्रों में सिलिकोसिस मरीजों के उपचार, उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार आदि पर भी फंड का उपयोग किया जाता है। एक अत्याधुनिक वैन तैयार की गई है, जो खनन क्षेत्रों में रोगियों की विभिन्न जांचें करती है।
केवल प्रतिबद्ध क्षेत्र में फंड उपयोग की अनुमति

राज्य सरकार ने इस वर्ष अप्रेल में बिना वित्त विभाग की पूर्व अनुमति के डीएमएफटी फंड के उपयोग पर पाबंदी लगा दी। सरकार ने केवल प्रतिबद्ध क्षेत्र में इस फंड के उपयोग की अनुमति दी है। इसमें सिलिकोसिस पीड़ितों को आर्थिक सहायता के साथ ही खनन क्षेत्रों में सरकार की बजट घोषणा के कामों में फंड के उपयोग की छूट है। राज्य सरकार की यही पाबंदी खनन क्षेत्रों के बाशिंदों पर भारी पड़ रही है।
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जिले की दशा बदल रही

डीएमएफटी फंड से जिले की दशा बदल रही है। वर्तमान में करीब 1300 करोड़ की राशि जमा है। विभाग समय- समय पर सिलिकोसिस पीड़ितों को आर्थिक मदद करता है। अब तक 22 करोड़ सिलोकोसिस रोगियों तथा 12 करोड़ रुपए कोरोना काल में खर्च किए हैं। स्कूल भवन, पौधारोपण, शिक्षा, स्वास्थ्य पर भी राशि खर्च की जा रही है।
जिनेश हुमड़, खनि अभियंता, भीलवाड़ा
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फैक्ट फाइल

2538 खदाने हैं भीलवाड़ा जिले में
325 करोड़ रुपए औसतन सालाना जमा हो रहे डीएमएफटी में

1931 करोड़ रुपए जमा हो चुके अब तक
1/3 हिस्सेदारी है राज्य में इस फंड में हमारी