नगर विकास न्यास (यूआईटी) की कार्यवाहक सचिव रजनी माघीवाल ने एमएनआईटी के एसोसिएट डीन (आर एंड सी) एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अरुण गौड को जांच करने के लिए पत्र लिखा। इसमें ओवरब्रिज के क्षतिग्रस्त हिस्से का सैम्पल लेकर सात दिन में जांच रिपोर्ट पेश करने को कहा। इस मामले की जांच सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधिकारी भी करेंगे। न्यास की चार सदस्यीय कमेटी भी जांच करेगी।
समय-समय पर जांचनी थी गुणवत्ता
एमएनआईटी को लिखे पत्र में कहा कि कोठारी ओवरब्रिज का निर्माण एचएस मेहता अजमेर कर रहे हैं। 2 दिसम्बर को ब्रिज पर बड़ा सुराख होने की सूचना पर जिला कलक्टर व न्यास अध्यक्ष एवं अधिकारियों ने मौका देखा। वहां ब्रिज की स्लैब में 2 से 3 इंच के छेद नजर आए। ब्रिज के नीचे से देखने पर पता चला कि दोनों गर्डर के बीच स्लैब का करीब 12 फीट लंब टुकडा क्षतिग्रस्त है, जबकि इस कार्य में एमएनआईटी ने समय -समय पर गुणवत्ता की रिपोर्ट दी। उसी आधार पर ठेका एजेंसी को भुगतान किया गया। गौड़ से अब जांच कर गुणवत्ता रिपोर्ट सात दिन में मांगी गई है।
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तीन अहम सवाल, जिनके यूआईटी को देना चाहिए जवाब
कोठारी नदी पर निर्माणाधीन पुलिया के लोकार्पण से पहले ही क्षतिग्रस्त होने से न्यास की कार्यशैली सवालों के घेरे में है। भ्रष्टाचार के इस मामले में तीन सवाल अहम है। पहला-चर्चा है कि न्यास प्रशासक आशीष मोदी की ओर से गठित जांच समिति में न्यास के अधिकारी शामिल किए गए, जबकि न्यास ही निर्माण कार्य करा रहा है। उसी निर्माण में भ्रष्टाचार का बड़ा सुराख हाल में नजर आया। दूसरा-नए सिरे से एमएनआईटी से गुणवत्ता रिपोर्ट लेंगे, जबकि वह अब तक की घटिया क्वालिटी का निर्माण पकड़ नहीं पाया। तीसरा-यूआईटी की ओर से अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया, जबकि न्यास के खिलाफ भ्रष्टाचार का मुकदमा चलना चाहिए था।