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आधी दुनिया को आगे बढ़ाने में पत्रिका का अहम योगदान

बदलते दौर के साथ आधी दुनिया पुरुषों के बराबर कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है। महिलाओं के काम को आगे बढ़ाने और उनको प्रोत्साहन देने में राजस्थान पत्रिका का अहम योगदान है। पत्रिका का धन्यवाद आज उन्होंने वुमन गेस्ट एडिटर के रूप में मुझे चुना। मुझे पत्रिका में प्रकाशित हो रही खबरों को जानने का मौका मिला, जो मेरे लिए गर्व की बात है। यह बात समाजसेविका स्नेहलता धारीवाल ने शनिवार को पत्रिका कार्यालय में बतौर वुमन गेस्ट एडिटर कही।
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भीलवाड़ा

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Akash Mathur

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Updated: 21 Aug 2022, 11:38 AM IST

आधी दुनिया को आगे बढ़ाने में पत्रिका का अहम योगदान

आधी दुनिया को आगे बढ़ाने में पत्रिका का अहम योगदान

बदलते दौर के साथ आधी दुनिया पुरुषों के बराबर कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है। महिलाओं के काम को आगे बढ़ाने और उनको प्रोत्साहन देने में राजस्थान पत्रिका का अहम योगदान है। पत्रिका का धन्यवाद आज उन्होंने वुमन गेस्ट एडिटर के रूप में मुझे चुना। मुझे पत्रिका में प्रकाशित हो रही खबरों को जानने का मौका मिला, जो मेरे लिए गर्व की बात है। यह बात समाजसेविका स्नेहलता धारीवाल ने शनिवार को पत्रिका कार्यालय में बतौर वुमन गेस्ट एडिटर कही।

उन्होंने कई समाचारों का अवलोकन किया। उनके प्रकाशन और महिलाओं को आगे बढ़ाने में पत्रिका की चल रही मुहिम को लेकर सुझाव दिए। रविवार के अंक में उनके सुझाव शामिल किए गए। धारीवाल ने कहा कि राजस्थान पत्रिका की ओर से चलाए जा रहे सामाजिक सरोकार के कार्यक्रम में महिलाओं की भागीदारी और बढ़ाई जानी चाहिए। समाज और देश में अपने काम के बूते काबिलियत का झंड़े गाड़ रही महिलाओं के काम को प्रमुखता से स्थान मिलना चाहिए ताकि अन्य महिलाएं भी सामाजिक कार्य में इनसे प्रेरणा ले सकें। 84 वर्षीय धारीवाल का इस उम्र में भी मानव सेवा का जज्बा लोगों को प्रेरित करता है। वे पत्रिका में प्रकाशित खबर के बाद देहदान का प्रेरणादायी संकल्प भी ले चुकी हैं। महिलाओं को भी आगे आना होगा धारीवाल का कहना है कि सामाजिक कार्य में भागीदारी निभाने के लिए महिलाओं को भी आगे आना चाहिए। इसके लिए पत्रिका ने भी मंच उपलब्ध करवाया है। समाज सेवा के लिए कोई उम्र नहीं होती। जरूरत है लगन की और निष्ठा की। महिलाएं किसी से कम नहीं है। उनमें आत्मनिर्भरता जागृत करने की जरूरत है। ऐसा कोई काम नहीं जो महिलाएं नहीं कर सकती। पति के निधन से टूटी, फिर संभली और मिसाल बनी धारीवाल का कहना है कि उनके पति का वर्ष-1991 में निधन हो गया। जीवन साथी चले जाने से टूट गई। लेकिन उनके पुत्र सुनील और दो बेटियों ने हिम्मत दी। उसके बाद वह कई सामाजिक संगठनों से जुड़ी और समाज में मिसाल कायम की। आज वह चिकित्सा, शिक्षा, समाज सेवा क्षेत्र में काम कर रही है। उनका काम अन्य महिलाओं में जागृति लाता है।