भीलवाड़ा शहर में सैकड़ों गोपालक हैं। वैदिक होली जलाने का चलन बढ़ने से इन गोपालकों का व्यापार बढ़ा है। कई सोसायटियों में गोबर से बने कंडे व स्टिक का इस्तेमाल होगा। अजित सिंह ने बताया कि गोबर से मात्र गोबर के कंडे ही नहीं, बल्कि दिए, बडबुले, हवन टिकिया, नारियल, पंचगव्य आदि बनाए गए हैं। हर्बल गुलाल भी बनाई गई है।