8 नवंबर 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

भीलवाड़ा में 75 जगह जलेगी कंडे की होली

भीलवाड़ा. पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण घटाने के लिए इस बार भीलवाड़ा शहर में 75 जगहों पर होली मनाई जाएगी। इसमें लकड़ियों की जगह गाय के गोबर से बने कंडे जलाए जाएंगे।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

भीलवाड़ा

•

image

Suresh Jain

•

Updated: 6 Mar 2023, 12:05 PM IST

भीलवाड़ा में 75 जगह जलेगी कंडे की होली

भीलवाड़ा में 75 जगह जलेगी कंडे की होली

भीलवाड़ा. पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण घटाने के लिए इस बार भीलवाड़ा शहर में 75 जगहों पर होली मनाई जाएगी। इसमें लकड़ियों की जगह गाय के गोबर से बने कंडे जलाए जाएंगे। इसके लिए करीब सवा से डेढ लाख कंडे बनाए गए हैं।


नौगांवा की माधव गोशाला के व्यवस्थापक अजितसिंह ने बताया कि शहर में कई जगहों पर गोबर के कंडों से होली जलाई जाएगी। इससे जो राख निकलेगी, उसका भी उपयोग किया जा सकता है। इस राख से पानी शुद्ध करने, घर से निगेटिव एनर्जी दूर करने और खेतों में खाद के तौर पर उपयोग किया जा सकता है। होली में गोबर के कंडे जलाने से प्रदूषण भी नहीं होगा। पेड़ भी नहीं कटंगे। शहर में सबसे बड़ी कंड़े की होली अग्रवाल समाज अग्रवाल उत्सव भवन में जलाएगा। इस बार मांग के आधार पर तीन रंगो की 800 किलोग्राम हर्बल गुलाल तैयार की गई। इन सामग्री के लिए शहर में 12 सेन्टर भी बनाए गए है।

राख का भी किया जाता है उपयोग
गोसेवकों के अनुसार गोबर से बनी स्टिक व कंडे से जली होलिका दहन की राख का भी उपयोग किया जा सकता है। इस राख से पानी को शुद्ध किया जाता है। इसके अलावा इसे घर में रखा जा सकता है। इससे निगेटिव एनर्जी नहीं आती है। साथ ही इस राख को खाद के तौर पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है। लोग अपने अपने घरों के गमलों में भी इसे डाल सकते हैं।
गोबर से बनी अन्य चीजें खरीद रहे लोग

भीलवाड़ा शहर में सैकड़ों गोपालक हैं। वैदिक होली जलाने का चलन बढ़ने से इन गोपालकों का व्यापार बढ़ा है। कई सोसायटियों में गोबर से बने कंडे व स्टिक का इस्तेमाल होगा। अजित सिंह ने बताया कि गोबर से मात्र गोबर के कंडे ही नहीं, बल्कि दिए, बडबुले, हवन टिकिया, नारियल, पंचगव्य आदि बनाए गए हैं। हर्बल गुलाल भी बनाई गई है।