पातोला महादेव
समीपवर्ती उपनगर पुर झील-जलाशयों व पर्वतों से घिरा छोटा लेकिन खूबसूरत स्थान है। यहां धार्मिक, प्राकृतिक एवं पर्यटन महत्व के स्थलों में देवडूंगरी, पातोला महादेव, अधरशिला, क्यारा का हनुमानजी, नीलकंठ महादेव , घाटाराणी, नृसिंह द्वारा, लाडूड्या डूंगर व राज सरोवर शुमार हैं। इसी प्रकार उपनगर सांगानेर में प्राचीन गढ़, कबीर द्वारा तथा सिंदरी के बालाजी नामक सुरम्य स्थल हैं जहां हनुमान मंदिर व बगीचा है। तात्या टोपे स्मारक इतिहास का साक्षी है।
सवाईभोज मंदिर
आसींद में सवाईभोज मंदिर गुर्जर समाज का प्रमुख धार्मिक तीर्थ स्थल है। मालासेरी देवडूंगरी भी आस्था का केन्द्र है। पहाडिय़ों से जुड़े परकोटे से घिरा बदनौर दुर्ग भी ऐतिहासिक है। शक्तिपीठ धनोप माता मंदिर, मांडल में ऐतिहासिक मिंदारे, बत्तीस खंभों वाली जगन्नाथ कछवाहा की छतरी प्रसिद्ध है।
जहाजनुमा मंदिर स्वस्तिधाम
शाहपुरा में रामनिवास धाम व क्रांतिकारी बारहठ परिवार का स्मारक भी पर्यटकों को खींच रहा है। ऐतिहासिक बनेड़ा दुर्ग, बनेड़ा राजभवन, बनेड़ा तालाब भी खास है। बनेड़ा दुर्ग तो विदेशी सैलानियों की खास पसंद है। जहाजपुर के जहाजनुमा मंदिर स्वस्तिधाम को रंग बिरंगी रोशनी में देखने के लिए दूर दराज से श्रद्धालु आते है। घाटारानी भी शक्तिपीठ है, हालांकि जहाजपुर का दुर्ग खण्डहर में बदल रहा हैं।
मंदाकिनी मंदिर शिल्प का बेजोड़ प्रतीक
बिजौलियां क्षेत्र में मंदाकिनी मंदिर शिल्प का बेजोड़ प्रतीक है। महाकालेश्वर मंदिर, हजारेश्वर महादेव व उंडेश्वर मंदिर भी स्थापत्य कला एवं मूर्तिशिल्प की दृष्टि से आकर्षक है। पहाड़ों के बीच शक्तिपीठ जोगणियां माता मंदिर है। निकट ही मेनाल झरना भी है।