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नवरात्र की तैयारियां शुरू, सज रहे मातारानी के दरबार

भीलवाड़ा. शारदीय नवरात्र 26 सितंबर से शुरू होंगे। कोरोना संक्रमण के कारण दो साल बाद इस नवरात्र पर गरबा महोत्सव को लेकर लोगों में उत्साह है।
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भीलवाड़ा

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Suresh Jain

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Updated: 22 Sep 2022, 9:15 AM IST

नवरात्र की तैयारियां शुरू, सज रहे मातारानी के दरबार

नवरात्र की तैयारियां शुरू, सज रहे मातारानी के दरबार

भीलवाड़ा. शारदीय नवरात्र 26 सितंबर से शुरू होंगे। कोरोना संक्रमण के कारण दो साल बाद इस नवरात्र पर गरबा महोत्सव को लेकर लोगों में उत्साह है। माताजी के मंदिरों में भी रंग - रोगन कर व गरबा आयोजन की तैयारियां शुरू हो गई है। शहर के प्रमुख मंदिर चामुडा माता मंदिर, गायत्री मंदिर, जोगणिया माता. धनोप माता, आवरी मात सहित आदि में तैयारियां शुरू हो गई है। मन्दिरों में विद्युत सजावट भी की जाएगी।

इधर, अनेक स्थानों पर भक्त मंडलों की ओर से पांडाल बनाए जा रहे हैं। गरबा मंडलों में युवक- युवतियां गरबे का अभ्यास कर रहे हैं। शहर में विभिन्न स्थानों पर मां दुर्गा की स्थापना पांडालों में होगी व गरबा होंगे। इसे लेकर माता की प्रतिमा व मूर्तियां बनाने वाले कलाकार माताजी की प्रतिमा को अंतिम रूप दे रहे हैं। रामधाम स्थित बंगाली कलाकार मां दुर्गा की प्रतिमा को रंग रोगन कर तैयार कर रहे हैं। बाजार में माताजी की शृंगार सामग्री की दुकान भी सज गई है।
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बंगाली समाज इस साल धूमधाम से मनाएगा दुर्गा पूजा का पर्व
कोरोना के दो साल बाद इस साल बंगाली समाज भी दुर्गा पूजा की तैयारियों में जुटा हुआ है। दुर्गा पूजा पर्व भीलवाड़ा में रह रहा बंगाली समाज धूमधाम से मनाएगा। इसके तहत षष्ठी पूजन से कार्यक्रम शुरू होंगे, जो दशमी पर विसर्जन के साथ ही पूर्ण होंगे। शहर के बापूनगर में प्रतिमा बनाने के लिए बंगाल से कारीगर आए हुए हैं, जो दिन-रात जुटे हुए हैं। बंगाली समाज के सदस्य ने बताया कि इस साल पूजा का के लिए मां की विशाल प्रतिमा बंगाली कलाकार ही बना रहे है। दशमी तक विविध पूजा-अनुष्ठान होते हैं। पहले दिन मां दुर्गा की मूर्ति की स्थापना होगी व छठी, सप्तमी, अष्टमी और दशहरा पर दुर्गा पूजा कार्यक्रम होगा।

सिंदूर खेलने की परंपरा भी निभाएंगे
षष्ठी से पुष्पांजलि और प्रसाद वितरण कार्यक्रम होगा। अष्टमी पूजन पर बड़ा कार्यक्रम होता है। पूरे समाज के लोग दर्शन व पूजा के लिए जुटते हैं। इसमें 108 कमल के फूल चढ़ाए जाएंगे। 108 दीप जलाए जाएंगे। वहीं, नवमी पर सुबह पूजा और हवन होगा। दशमी पर विसर्जन की रस्म निभाई जाएगी। साथ ही सिंदूर खेलने की परंपरा सुहागिनें हमेशा की तरह निभाएंगी।