यह पुलिया गत 2 दिसम्बर को क्षतिग्रस्त हो गई थी। पुलिया में छेद से न्यास अभियंताओं की कार्यशैली पर अंगुली उठी। लेकिन न्यास ने जिम्मेदार एक भी अभियंता के खिलाफ कार्रवाई नहीं की। इस सम्बंध में न्यास की ओर से एक मामला सुभाषनगर थाने में भी दर्ज कराया गया था। एमएनआईटी टीम ने 10 व 11 दिसंबर को भीलवाड़ा पहुंच कर पुलिया की जांच की थी। जांच के लिए टीम निर्माण सामग्री की कटिंग करके सेम्पल साथ ले गई थी। एमएनआईटी के जांच अधिकारी डॉ. अरुण गौड़ ने बताया कि जांच रिपोर्ट 24 जनवरी को डाक के माध्यम से न्यास को भेज दी थी। रिपोर्ट न्यास सचिव को मिल गई है। इस पर मंगलवार को चर्चा होनी थी, लेकिन न्यास सचिव अजय आर्य व विशेषाधिकारी रजनी माघीवाल के वहां मौजूद नहीं होने से चर्चा नहीं हुई। सूत्रों के मुताबिक पुलिया निर्माण में सीमेन्ट के साथ कुछ मात्रा में फ्लाई ऐश मिलाना था, लेकिन इसकी मात्रा अधिक होने से पुलिया निर्माण में गड़बड़ी हुई है। हालांकि इसका खुलासा रिपोर्ट को देखने के बाद ही होगा। वही माना जा रहा है कि दो स्लेब नए सिरे से बनाने होंगे। यह कार्य ठेकेदार को अपनी जेब से करना होगा।
कलक्टर ने दिए थे जांच के आदेश