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कोरोना काल के 14 माह में दिखाए जज्बे को सलाम

डॉक्टर्स डे विशेष
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भीलवाड़ा

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Suresh Jain

•

Updated: 1 Jul 2021, 10:39 AM IST

कोरोना काल के 14 माह में दिखाए जज्बे को सलाम

कोरोना काल के 14 माह में दिखाए जज्बे को सलाम

भीलवाड़ा।
कोरोना के रूप में अचानक सामने आई आपदा ने दुनिया को एक झटके से कई सबक सीखा दिए। कोरोना वायरस से जंग में अग्रिम मोर्च पर चिकित्साकर्मी तैनात रहे। मुश्किल समय में डॉक्टर्स ने अपनी पेशेगत सेवा से मानवता को बचाए रखा। एेसे में स्विस मनोचिकित्सक कार्ल जंग की यह पंक्तियां, 'दवा बीमारियों का इलाज करती है लेकिन केवल डॉक्टर ही मरीजों को ठीक कर सकते हैंÓ सटीक बैठती है। पिछले १४ माह में डॉक्टर और स्वास्थ्य कार्यकर्ता कोविड-19 के कठिन दौर में लोगों की सांसे बचाने को जूझ रहे हैं। इस घातक वायरस से लड़ते हुए कई डॉक्टर खुद इसकी चपेट में आ चुके। कुछ तो जिंदगी की जंग भी हार गए। बहुत सारे डॉक्टरों का सामूहिक प्रयास हमेशा याद रखा जाएगा।
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डॉ. सुरेश ने बिन पीपीई किट देखे मरीज
मांडलगढ़ में कार्यरत डॉ. सुरेश गजराज को सीएमएचओ ने आयुष चिकित्सालय में लगाया। डॉ. गजराज ने पहली व दूसरी लहर में डॉक्टर विनोद शर्मा के साथ ८० से १०० मरीजों की देखभाल की। पहले पीपीई कीट में मरीजों के देखते थे, लेकिन लगातार २४ घंटे काम करने के दौरान पीपीई से परेशानी होनेलगी तो पहनना बंद कर दिया। आयुष चिकित्सालय में में १०० बेड खासतौर पर कोविड मरीजों के लिए रखे गए। आयुष में कई चुनौती थी। पहली हॉस्पिटल में आने वाले कोरोना मरीज की तो दूसरी मरीजों व उनके परिजनों से निबटने की थी। यहां ज्यादातर मरीज मध्यम या कम आय वर्ग के थे। २५ से ९० साल तक के मरीजों को रखा। कई बार बेड खाली नहीं होने पर एम्बुलेंस में घंटों इलाज किय। टीम में डॉ. अनुराग शर्मा का काम मैनेजमेन्ट का था। उन्होंने ऑक्सीजन की कमी नहीं आने दी। डॉ. गजराज ने बताया कि अप्रेल में पत्नी ने सिजिरियन से बच्ची को जन्म दिया लेकिन तब कोरोना पीक पर था। तब दो घंटे का समय भी नहीं निकाल पाया था।
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डॉ. भवानी ने ऑक्सीजन लेवल ३० होने पर भी बचाई जानें
रायपुर के डॉ. भवानी सिंह ने कई मरीजों का ऑक्सीजन लेवल ३० से ३५ होने के बाद भी बिना रेमेडेसिविर इंजेक्शन के उपचार किया। ऐसे केस तीन-चार थे। डॉ. सिंह ने बताया कि उनकी टीम ने काफी मेहनत की। रायपुर के रईस पठान का ऑक्सीजन लेवल मात्र ३५ था। वह एमजीएच भीलवाड़ा में भर्ती रहने के बाद रायपुर आ गया था। फिर उसका उपचार कर ९५ ऑक्सीजन लेवल आने पर घर भेजा। आज बिल्कुल ठीक है। आसीन्द ब्लॉक की मसीना बानू को भी ऑक्सीजन लेवल ३५ होने पर बचाया। एक अन्य व्यक्ति की हालत इतनी गंभीर थी कि उसे बचाना मुश्किल लग रहा था। उसका ऑक्सीजन लेवल मात्र १० से १५ था लेकिन उपचार करते हुए स्टेबल किया। फिर ७० तक ऑक्सीजन लेवल लाने के बाद भीलवाड़ा रेफर किया था। आज वह बिल्कुल ठीक है।
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डॉ. शर्मा वैक्सीनेशन के इंतजाम संभाले
आरसीएचओ डॉ. संजीव शर्मा के पास टीकाकरण की जिम्मेदारी है। ११ जून को एक दिन में लगभग ७० हजार टीके लगाए गए लेकिन इंतजाम इतने पुख्ता थे कि किसी को परेशानी नहीं आई। इसके बाद जिला कलक्टर शिवप्रसाद एम नकाते व मुख्य सचिव ने भी डॉ. शर्मा की कार्यप्रणाली सराही। डॉ. शर्मा ने एमडी के साथ पीएसएम का कोर्स किया है। इस कारण डॉ. शर्मा १६ जनवरी से कोरोना से बचाव के लिए वैक्सीनेशन का काम बखूबी से देख रहे हैं। प्रिवेंटिव एंड सोशल मेडिसन (पीएसएम-निवारक और सामाजिक चिकित्सा) का कोर्स जिले में मात्र तीन डॉक्टरों ने कर रखा है। इनमें सीएमएचओ डॉ. मुस्ताक खान, डिप्टी सीएमएचओ डॉ. घनश्याम चावला व आरसीएचओ डॉ. संजीव शर्मा शामिल है।
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डॉ. हरीश ने टीके को लेकर बढ़ाई जागरूकता
जहाजपुर के डॉक्टर हरीश यादव ने कोरोना काल में मेहनत के साथ अब वैक्सीनेशन की कमान संभाल रखी है। टीकाकरण में जहाजपुर सबसे नीचे १७वें स्थान पर था। उन्होंने एसडीएम, पटवारी, राशन डीलरों की मदद से लोगों को समझाने का काम किया। आज जहाजपुर उपखण्ड ४५ प्लस में दूसरे तथा १८ प्लस में तेजी से आगे बढ़ रहा है। यादव का कहना है कि लगातार वैक्सीन नहीं मिलने से लोगों के टीका लगाने में थोड़ी परेशानी आ रही है। पहले जहां लोग टीका लगाने से कतरा रहे थे तो अब वे समझाइश के बाद टीका लगाने लगे हैं। सीकर निवासी यादव पत्नी के गर्भवती होने पर भी गांव नहीं गए। उन्हें पत्नी के प्रसव के आखिरी दिनों में साथ नहीं रहना अखरता है।
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डॉ. गौड़: खुद बीमार होने पर भी इलाज में जुटे रहे
कोरोना की पहली लहर में देश में 'भीलवाड़ा मॉडलÓ की छाप रही। तब एमजीएच अधीक्षक डॉ.अरुण गौड़ एवं उनकी पत्नी डॉ. रजनी गौड़ स्वास्थ्य योद्धाओं में शामिल रहे। गौड़ दम्पती कोरोना संक्रमित हो चुके हंै। रजनी दो बार संक्रमित हुई हैं। शहर में कोरोना प्रभावितों को तुरंत इलाज मिले, इसके लिए डॉ. गौड़ घंटों चिकित्सालय में पीपीई किट में मुस्तैद रहे। शुरुआती दिनों में कई रात नहीं सोए। इसी भाग दौड़ के बीच खुद को सुरक्षित नहीं रख पाए और ७ सितम्बर २०२० को संक्रमित हो गए। दस दिन एमजीएच में भर्ती रहे। इस दौरान एमजीएच व पीएमओ कार्यालय के काम के साथ ही अन्य कोरोना मरीजों व सामान्य रोगियों को अच्छे इलाज की कोशिश जारी रखी। डॉक्टरों के साथ कोविड वार्ड में चर्चा करते थे। वेबिनार के जरिए रोगियों की स्थिति एवं इलाज की समीक्षा करते थे। जिला कलक्टर, सीएमएचओ एवं प्रशासनिक अधिकारियों के साथ भी वेब चर्चा करते। छुट्टी मिलने के बाद चार दिन होम आइसोलेट रहे। दूसरी लहर में हेल्प डेस्क के जरिए कई जानें बचाई। पत्नी डॉ. रजनी भी नेत्र वार्ड व आउटडोर में रोगियों की देखभाल में जुटी रही।