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117 दिन बाद फिर गूंजेगी शहनाई

एकादशी के साथ ही रविवार से अगले 117 दिन तक मांगलिक कार्यों तथा वैवाहिक आयोजनों पर रोक लग गई है।
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भीलवाड़ा

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Suresh Jain

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Updated: 11 Jul 2022, 8:32 AM IST

117 दिन बाद फिर गूंजेगी शहनाई

117 दिन बाद फिर गूंजेगी शहनाई

एकादशी के साथ ही रविवार से अगले 117 दिन तक मांगलिक कार्यों तथा वैवाहिक आयोजनों पर रोक लग गई है। वजह यह है कि 10 जुलाई को देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु शयन में चले गए। साथ ही चातुर्मास के लिए भी जैन संतों का मंगल प्रवेश हो चुका है। अब 4 महीने तक शादी, सगाई, गृह प्रवेश, मुंडन और अन्य मांगलिक काम नहीं होंगे। हालांकि इन दिनों में खरीदारी, लेन-देन, निवेश, नौकरी और बिजनेस जैसे नए कामों की शुरुआत के लिए शुभ मुहूर्त रहेंगे।


पंडित अशोक व्यास ने बताया कि इस साल भगवान विष्णु 117 दिन योग निद्रा में रहेंगे। संत और आम लोग धर्म-कर्म, पूजा-पाठ और आराधना में समय बिताएंगे। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी 10 जुलाई को है। इसे हरिशयनी के नाम से भी जाना जाता है। भगवान विष्णु कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष (5 नवंबर) को देवउठनी एकादशी पर जागेंगे। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक इस अवधि में सृष्टि को संभालने और कामकाज संचालन का जिम्मा भगवान भोलेनाथ के पास रहेगा।
व्यास ने बताया कि आषाढ़ माह की एकादशी से पूर्णिमा तक चार दिन, फिर 29 दिन का श्रावण और 30 दिन का भाद्रपद महीना रहेगा। अश्विन मास में 29 और कार्तिक मास के 25 दिन रहेंगे। इस तरह 117 दिन का चातुर्मास रहेगा। पिछले साल आश्विन मास का अधिकमास था। इस कारण चातुर्मास चार नहीं पांच महीने का रहा। सावन से लेकर कार्तिक तक चलने वाले चातुर्मास में नियम-संयम से रहने का विधान बताया गया है। इन दिनों में सुबह जल्दी उठकर योग, ध्यान और प्राणायाम किया जाता है।
चातुर्मास के चार माह
श्रावण-आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी से श्रावण शुक्ल एकादशी 10 जुलाई से 8 अगस्त तक
भाद्रपद- श्रावण शुक्ल पक्ष की एकादशी से भाद्रपद शुक्ल एकादशी 8 अगस्त से 6 सितंबर तक
आश्विन- भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी से आश्विन शुक्ल एकादशी 6 सितंबर से 6 अक्टूबर तक
कार्तिक- आश्विन शुक्ल पक्ष की एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी 6 अक्टूबर से 5 नवंबर तक