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नालेे में बही गर्भवती महिला का 28 घण्टे बाद मिला शव

क्षेत्र के रघुनाथपुरा गांव में चिकित्सक को दिखाकर लौटते समय बरसाती नाले में बही गर्भवती महिला का शव रविवार को 28 घण्टे मशक्कत के बाद गोताखोरों ने ढूंढ निकाला। पुलिया से पचास मीटर दूरी पर झाडि़यों में शव फंसा मिला।
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सागर

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Tej Narayan Sharma

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Updated: 4 Sep 2016, 9:05 PM IST

क्षेत्र के रघुनाथपुरा गांव में चिकित्सक को दिखाकर लौटते समय बरसाती नाले में बही गर्भवती महिला का शव रविवार को 28 घण्टे मशक्कत के बाद गोताखोरों ने ढूंढ निकाला। पुलिया से पचास मीटर दूरी पर झाडि़यों में शव फंसा मिला। ढांढस बांधे बैठे परिजनों का धैर्य जवाब दे गया और मौके पर कोहराम मच गया।

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शाहपुरा थाना पुलिस ने लुलास निवासी आशा पत्नी भैरू गुर्जर का मौके पर पोस्टमार्टम कराया। महिला के गर्भ से निकले आठ माह के बच्ची के शव को परिजनों को सौपा तो हर आंखें नम हो गई। उपखण्ड अधिकारी कालूराम खौड व थानाप्रभारी डूंगरसिंह ने परिजनों को ढांढस बंधाया।

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रोकना पड़ा ऑपरेशन, गोताखोरों की मदद

शनिवार देर रात बरसाती नाले को खंगालने का काम रोक दिया गया। सुबह भोर होते ही दुबारा से आशा की तलाश की गई। मेजा, बीगोद और शाहपुरा से गोताखोर पहुंच गए। इस बीच कोटा से आई आरएसी की रेस्क्यू टीम भी तलाश में लग गई। मशक्कत के बाद रविवार शाम को शव तलाश लिया लिया गया। ग्रामीणों ने मृतका के परिजनों को आर्थिक सहायता दिलाने की उपखण्ड अधिकारी से मांग की।

उपखण्ड अधिकारी ने नियमानुसार सहायता दिलाने का आश्वासन दिया। मृतका के तीनों बच्चों को पालनहार योजना से जोडऩे के उपखण्ड अधिकारी ने निर्देश दिए। पूर्व पंचायत समिति सदस्य महावीर मीणा व अन्य ग्रामीणों ने रघुनाथपुरा गांव की पुलिया की ऊंचाई बढ़ाने की मांग की। ग्रामीणों का कहना था कि बारिश के दिनों में पूरा गांव टापू बन जाता है। पुलिया छोटी होने से बहाव तेज होने पर रास्ता बंद हो जाता है। कई बार हादसे हो चुके है। अधिकारियों ने पंचायत समिति के सहायक अभियंता को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

यह था मामला

आशा शनिवार दोपहर में शाहपुरा में चिकित्सक को दिखाने गई। उसके साथ देवरानी मेमू गुर्जर भी चार माह के पुत्र के साथ थी। चैकअप कराने के बाद शाहपुरा से शिवराज गुर्जर बहन आशा और देवरानी को मोटरसाइकिल पर लुलास छोडऩे आया। रघुनाथपुरा के निकट उफान पर आए बरसाती नाले ने उनका रास्ता रोक लिया। शिवराज ने बाइक को सडक किनारे कर बहन आशा का हाथ पकड़ कर उसे नाला पार करवा रहा था। आशा का पीछे आ रही देवरानी ने हाथ पकड़ा हुआ था। पुलिया के बीच ही पहुंच होंगे कि सडक खराब होने से आशा का संतुलन बिगड़ गया। गड्ढ़े में पैर चले जाने से आशा बहाव में बह गई। इससे पीछे मासूम को गोद में लेकर आ रही देवरानी भी संतुलन नहीं बना पाई। मासूम बच्चे के साथ वह भी बहने लगी। देवरानी और उसके बच्चे को बचा लिया गया जबकि आशा बह गई।