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पारा: बढ़ने लगी तपन, परिंदे: लौटने लगे वतन

सर्दियों में चावंडिया, गुरला व धांधोलाई तालाब आते हैं सैकड़ों विदेशी प्रजातियों के हजारों पक्षी
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भीलवाड़ा

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Suresh Jain

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Updated: 29 Mar 2023, 9:46 AM IST

पारा: बढ़ने लगी तपन, परिंदे: लौटने लगे वतन

पारा: बढ़ने लगी तपन, परिंदे: लौटने लगे वतन

भीलवाड़ा. जिले में पारा चढ़ने लगा है। तपन बढ़ने लगी तो प्रवासी परिंदे भी अपने वतन लौटने लगे हैं। विभिन्न देशों में सर्दियों में बर्फबारी से परेशान होकर हजारों पक्षी भारत का रुख करते हैं। भीलवाड़ा जिले के चावंडिया तालाब, गुरला, धांधोलाई तालाब आदि जलाशयों में प्रवासी पक्षियों का भारी जमावड़ा देखने को मिलता है। इनको जिले में सर्दियों का सीजन रास आता है। ये प्रवासी परिंदे मार्च में गर्मी की दस्तक होने पर स्वदेश वापसी करने लगते हैं। चावंडिया तालाब से आए दिन प्रवासी परिंदों का लौटना शुरू हो गया है।

चावंडिया तालाब में हर सर्दी में सैकड़ों प्रजातियों के हजारों विदेशी पक्षी नजर आते हैं। यहां सैलानियों का खूब मनोरंजन करते हैं। इनको देखने बड़ी तादाद में सैलानी आते हैं। तालाब में अठखेलियां दर्शाती है कि यहां का माहौल इन्हें भाता है। सदियों में विदेशी साइबेरियन, मुर्गाबी, पिंटेल डक, पोर्ट बिल, बार हेडिड गूज एवं कूट आदि मेहमान यहां आते हैं। ये प्रजातियां अब लौटने लगी है।
सुविधाएं मिले तो बढ़ेगी संख्या

विदेशी मेहमान सदियों में हजारों मील का सफर तय कर यहां पहुंचते हैं। सरकार ने हाल में चावंडिया तालाब को वेटलैंड घोषित किया, जो पक्षियों के लिए लाभदायी रहेगा। क्षेत्र का विकास होगा। हालांकि सुविधाएं कब बढ़ेगी, यह कहना अभी मुश्किल है। जिला प्रशासन को प्रवासी पक्षियों के लिए ऐसा स्थान तय करना चाहिए, जहां वह सुरक्षित महसूस करें और अनुकूल वातावरण मुहैया करा सके। इनको गुरला तालाब, धांधोलाई आदि जलाशयों में रहने व खाने-पीने तथा पर्याप्त जगह मिले तो प्रवासी पक्षियों की संख्या और बढ़ सकती है। हालांकि चावंडिया तालाब पहुंचने वाले प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा को लेकर इलाके के ग्रामीण सतर्क हैं।
रास आती है सर्दियां

विदेशी पक्षी मौसम में गर्माहट आते ही वतन वापसी करने लगते हैं। हालांकि कुछ पक्षी अभी गुरला व चावंडिया तालाब पर देखे जा सकते हैं। इनमें रूडी शेल डक, जिसे सुर्खाब भी कहा जाता है शामिल है। इनका एक जोड़ा चावंडिया तालाब पर देखा गया है। टफ्टेड डक का छोटा समूह गुरला तालाब में ठहरा है। चावंडिया में कुछ कॉमन पोचार्ड भी देखे जा सकते हैं।

डॉ. अनिल त्रिपाठी, पक्षी प्रेमी