गैंगरेप की शिकार होकर कोयले की भट्टी की चिता में समा गई किशोरी के घर पर सन्नाटा पसरा हुआ था। एक कोने में दुबकी मां के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। कई बार बेटी को याद करके बेसधु तक हो गई। उसे यकीन ही नहीं हो रहा था कि कल तक घर में बहनों और भाइयों के साथ झगड़ा और अठखेलिया करने वाली उनकी बेटी इस दुनिया में नहीं रही। मां के साथ पिता का भी यहीं हाल था। हर आहट पर उनको बेटी के आने का इंतजार था। दो भाइयों और दो बहनों की आंखें भी रो-रोकर पथरा गई थी। परिजनों को मलाल है कि राक्षसी प्रवृत्ति के समान हरकत करने वाले आरोपियों ने उनकी बेटी का अंतिम संस्कार तक नहीं करने दिया। उसके साथ बर्बरता करके मार दिया।