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राजस्थान का यह कैसा थाना, छह माह में आठ मामले ही

भीलवाड़ा के साइबर थाने में छह माह में महज आठ मामले दर्ज हुए। ऐसा नहीं है कि जिले में साइबर ठगी हुई ही नहीं, लेकिन एक लाख से कम के मामले यहां दर्ज नहीं होते। लिहाजा यहां आने वाले ठगी के अधिकतर शिकार बैरंग लौटा दिए जाते हैं। साइबर ठगी के बढ़ते मामलों पर अंकुश के लिए राजस्थान में साइबर थाने खोले, लेकिन एक लाख का नियम पीडि़तों को न्याय से दूर कर रहा है। एक लाख से नीचे की ठगी के मामलों के लिए अब भी लोग एक थाने से दूसरे थाने चक्कर लगा रहे।
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भीलवाड़ा

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Akash Mathur

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Updated: 17 Jul 2023, 12:48 PM IST

 राजस्थान का यह कैसा थाना, छह माह में आठ मामले ही

राजस्थान का यह कैसा थाना, छह माह में आठ मामले ही

भीलवाड़ा के साइबर थाने में छह माह में महज आठ मामले दर्ज हुए। ऐसा नहीं है कि जिले में साइबर ठगी हुई ही नहीं, लेकिन एक लाख से कम के मामले यहां दर्ज नहीं होते। लिहाजा यहां आने वाले ठगी के अधिकतर शिकार बैरंग लौटा दिए जाते हैं। साइबर ठगी के बढ़ते मामलों पर अंकुश के लिए राजस्थान में साइबर थाने खोले, लेकिन एक लाख का नियम पीडि़तों को न्याय से दूर कर रहा है। एक लाख से नीचे की ठगी के मामलों के लिए अब भी लोग एक थाने से दूसरे थाने चक्कर लगा रहे।


इसके बाद भी राहत दिलाना दूर, फरियाद तक नहीं सुनी जा रही। दरअसल, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने हर जिले में साइबर थाना खोलने की बजट में घोषणा की थी। भीलवाड़ा में जनवरी में थाना खुल गया और 1 फरवरी से विधिवत शुरुआत हुई। इस समय थाने में एक डीएसपी स्तर का अधिकारी, एक निरीक्षक व अन्य स्टाफ लगा रखा है। यहां स्टाफ पूरी तरह साइबर एक्सपर्ट नहीं है। उनको प्रशिक्षण दिलाया जा रहा है। सरकार ने नफरी और संसाधन पूरे दिए, लेकिन यहां एक लाख रुपए से अधिक की साइबर ठगी के मामले थाने में दर्ज होने के नियम लगा दिए। इससे नीचे के मामले यहां दर्ज नहीं होते।

सावधानी ही बचाव
- अनजान कॉल करने वाले को कभी बैंक खाते की जानकारी नहीं दें

- बैंक कभी खाते की जानकारी नहीं मांगता, ना ही कोई ओटीपी भेजता है

- एटीएम के पासवर्ड अनजान को नहीं बताएं

- मोबाइल पर आए अनजान लिंक को नहीं खोले

इनका कहना है

थाने में साइबर ठगी के एक लाख के मामले ही दर्ज होते है। यह नियम है। इसलिए मुकदमों का रजिस्ट्रेशन कम हुआ। इससे कम राशि के लिए सम्बंधित थाने को भेजते हैं।
- कन्हैयालाल , थानाप्रभारी, साइबर थाना
.....
केस-1
बापूनगर के राजेश शर्मा के मोबाइल पर कॉल आया। खुद को बैंक मैनेजर बताकर एटीएम कार्ड अवधि समाप्त होने की बात कही। बातों के झांसे में उलझा कर पासवर्ड जान 88 हजार रुपए निकाल लिए। पीडि़त रिपोर्ट लेकर साइबर थाने गया तो उसे एक लाख रुपए का नियम बताकर रवाना कर दिया। पीडि़त अन्य थानों के चक्कर काट रहा है।

केस-2

शास्त्रीनगर के गिरधारीलाल को फोन कर ठग ने खुद को कम्पनी का प्रतिनिधि बताया। पीडि़त को भाग्यशाली बताकर लॉटरी खुलने का झांसा दिया। बैंक खाते की डिटेल लेकर हैंग कर लिया। उसके बाद खाते से 95 हजार रुपए पार हो गए। पीडि़त को साइबर थाने से टरका दिया। एक लाख से कम की ठगी होने से रिपोर्ट दर्ज नहीं की।