नेता जनता के समक्ष अपना बहीखाता रखें और बताएं कि ऐसे कौनसे कार्य व उपलब्धियां है, जिन्हें जनता 50 साल तक याद रखेगी। इतना तय है कि नेताओं के पास भीलवाड़ा शहर के लिए गिनाने लायक कोई बड़ी उपलब्धि नहीं है। कुछ ग्रामीण नेताओं की चाह तो अपने क्षेत्र में विकास करवाने तक सिमटी है जबकि भीलवाड़ा शहर की आबोहवा के कारण ही इनकी किस्मत चमकी है। शहर के नेताओं को भी अतिथि बनकर साफा व माला पहनने से फुर्सत नहीं मिल रही। इनके पास भी गिनाने लायक बड़ा कुछ नहीं है।बड़ा सवाल यह है कि भीलवाड़ा शहर किसका है, भीलवाड़ा का 'लाल' कौन है और भीलवाड़ा की लड़ाई कौन लड़ेगा? सवाल यह भी है कि ऐसी क्या मजबूरी है कि जिसकी वजह से अफसर व नेता आंखों पर उपेक्षा की पट्टी बांधे बैठे हैं।