निरहुआ ने गायकों और लेखकों पर रोक लगाने की बात तो कही, लेकिन उन्होंने उन गानों को सुनने वाले लोगों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "अगर ये गाने सिर्फ ट्रकों में बज रहे होते, तो समझ आता कि कोई बदमाश गाना बजा रहा है। लेकिन आज लोग अपनी शादियों में, अपने घर के आंगन में, जहां मां-बहन और बेटियां बैठी हैं, वहां ये गंदे गाने बजा रहे हैं। उनको वो गोबर महकना बंद हो गया। उनको समझ ही नहीं आ रहा है कि हम क्या कर रहे हैं।"