
आरआइआरडी में रोज 200 मरीज पहुंच रहे -demo pic patrika
Bhopal RIRD : दिवाली पर घर चमकाने की तैयारी सांसों पर भारी पड़ रही है। अलमारियों, पर्दों, पंखों और फर्नीचर की सफाई से उड़ते धूल के कण, पॉलिश के केमिकल कण और बदलता मौसम सांस के मरीजों की परेशानी बढ़ा रहे हैं। अस्थमा, एलर्जी और सीओपीडी के मरीजों पर इसका ज्यादा असर पड़ रहा है। क्षेत्रीय श्वसन रोग संस्थान (आरआइआरडी) में रोज 180 से 200 मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें 100 मरीज मौसमी बदलाव से प्रभावित हैं। धूल और केमिकल्स से सांस के मरीजों के लिए मुश्किलें बढ़ रहीं हैं। डॉक्टर्स का कहना है कि सावधानी बरतने की खासी जरूरत है। पॉलिश के केमिकल के साथ ही मौसम भी लोगों को प्रभावित कर रहा है।
घर-घर जमा ई-वेस्ट, कबाड़ कारोबारियों के हवाले
दिवाली की सफाई में पुराने मोबाइल, टीवी, इलेक्ट्रॉनिक खिलौने और बैटरियां निकल रही हैं। इनके सुरक्षित निस्तारण की निगरानी का अभाव है। कबाड़ कारोबारी इन्हें धड़ल्ले से खपा रहे हैं। ई-वेस्ट को खुले में तोडऩे या जलाने से सीसा, पारा और कैडमियम जैसे हानिकारक तत्व हवा में फैलते हैं। लंबे समय तक संपर्क से फेफड़ों, किडनी और तंत्रिका तंत्र को नुकसान का खतरा रहता है।
दिवाली के आसपास राजधानी में रोज 250 से 300 टन अतिरिक्त कचरा निकल रहा है। सामान्य दिनों के 850 मीट्रिक टन के मुकाबले अब यह 1100 से 1200 टन तक पहुंच गया है।
आरआइआरडी अधीक्षक डॉ. लोकेंद्र दवे के अनुसार, सफाई के दौरान मास्क पहनें और सूखी झाड़ू के बजाय गीले कपड़े से धूल साफ करें। पटाखों के धुएं, सिगरेट और तेज सुगंध से बचें। निर्धारित दवाएं और इनहेलर नियमित लें। जीएमसी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पराग शर्मा ने भी सांस के मरीजों को धूल-धुएं से बचने की सलाह दी है।
सूखी झाड़ू से उडऩे वाली धूल और पॉलिश के रसायन सांस की नलियों में जलन पैदा कर सकते हैं। इससे खांसी, छींक, नाक बहना, सीने में जकडऩ और सांस फूलने की शिकायत हो सकती है। पहले से अस्थमा और सीओपीडी से पीडि़त मरीजों की परेशानी बढ़ सकती है। गंभीर स्थिति में अस्पताल में भर्ती करने की नौबत भी आ सकती है।
Updated on:
3 Nov 2026, 8:25 AM IST
Published on:
3 Nov 2026, 8:25 AM IST
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