
बहुत कीमती राख पूरी तरह मुफ्त में
भोपाल। कोई रातोंरात करोड़पति बनना चाहता है तो उसके लिए सबसे अच्छा मौका है। वह राख बेचकर अपनी यह मुराद पूरी कर सकता है। यह ऐसी—वैसी राख नहीं है बल्कि इसका उपयोग सीमेंट बनाने में किया जाता है. सबसे खास बात यह है कि यह कीमती राख बिल्कुल मुफ्त में मिल रही है। प्रदेश की पावर जनरेशन कंपनी के बिजली तापगृह से कोई भी ये राख अब उठा सकता है। जिन जगहों पर राख का कच्चेमाल की तरह इस्तेमाल होता है, ऐसी औद्योगिक इकाइयां तापगृह से ये राख उठा भी रही हैं।
कंपनी ने पर्यावरण का हवाला देते हुए तापगृह से निकलने वाली राख को नहीं बेचने का फैसला लिया - मप्र पावर जनरेशन कंपनी पहले ये राख बेचकर करोड़ों रुपए कमा रहीं थीं। अप्रैल के बाद तापगृहों से राख बेचना बंद कर दिया गया. अब ये राख मुफ्त में मिल रही है। बिजली कंपनी के तापगृहों से मासिक औसतन 6.5 लाख टन राख निकल रही है। दरअसल कंपनी ने पर्यावरण का हवाला देते हुए तापगृह से निकलने वाली राख को नहीं बेचने का फैसला लिया है।
बिरसिंहपुर के संजय गांधी तापगृह में 92 रुपये प्रति टन बेची जाती थी राख - बिरसिंहपुर के संजय गांधी तापगृह में 92 रुपये प्रति टन राख बेची जाती थी। इससे तापगृह करोड़ों रुपए कमाता था। यहां से रोजाना कई टन राख का परिवहन होता है। इसी तरह खंडवा के श्री सिंगाजी तापगृह में राख बेची जाती थी. यहां से 12 रुपए प्रति टन के हिसाब से राख बेची जाती थी।
तापगृहों से निकलने वाली राख दो तरह की होती है। हवा में उड़नेवाली राख जिसे फ्लाई एश कहा जाता है और पानी में गिरनेवाली राख जिसे वाटम एश कहते हैं। फ्लाई एश का सीमेंट बनाने में उपयोग किया जाता है।
कंपनी के तापगृह - पैदा हुई राख— 31 मार्च 2022 की स्थिति।
संजयगांधी तापगृह- 224953 टन
सारनी तापगृह- 88424 टन
अमरकंटक तापगृह- 27978 टन
श्रीसिंगाजी खंडवा- 308433 टन
कुल- 649788 टन
Published on:
06 Jun 2022 09:23 pm
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