
भोपाल के ऐशबाग इलाके में बना 90 डिग्री ब्रिज (फोटो सोर्स Patrika)
Engineers Day Special : किसी भी देश के निर्माण और विकास के लिए इंजीनिर्स का बड़ा योगदान होता है। तेजी से विकसित होते भारत के निर्माण में भी इंजीनियरों का अहम योगदान है। इसी योगदान को सराहने के लिए हर साल 15 सितंबर को इंजीनियर दिवस मनाया जाता है। इसी दिन 1860 में देश के महान इंजीनियर और भारत रत्न मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया का जन्म हुआ था। उनके जन्मदिवस पर हर साल इंजीनियर-डे मनाया जाता है। वैसे तो इंजीनियर का योगदान उनके आधुनिक कार्यों से होता है, पर कभी-कभी कुछ ऐसे काम भी हो जाते हैं, जिनके चलते उन्हें किरकिरी का सामना करना पड़ता है। ऐसे ही पिछले दिनों मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में इंजीनियरों के एक कार्य की चर्चा देश-प्रदेश ही नहीं, बल्कि विदेशों तक हुई है।
हम बात कर रहे हैं राजधानी भोपाल के ऐशबाग इलाके में पीडब्ल्यूडी विभाग के इंजीनियरों द्वारा बनाए गए 90 डिग्री फ्लाईओवर की। बड़े इलाके में यातायात दबाव को कम करने के उद्देश्य से बनाए गए इस ब्रिज के तैयार होने से पहले ही इसके बनाने वालों की किरकिरी होनी शुरु हो गई थी। वजह थी, ब्रिज के बीचो-बीच पहुंचने पर सामने आने वाला 90 डिग्री मोड़। यानी ब्रिज के सबसे ऊंचे स्थान पर पहुंचने के बाद वाहन चालक को पता ही नहीं चल सकता था कि, सामने से कौन आ रहा है। ऐसे में हादसों का खतरा बहुत अधिक होने के चलते 18 करोड़ की लागत से बने पुल के शुरु होने से पहले ही उसके निर्माण की जमकर आलोचना होने लगी।
ब्रिज निर्माण को लेकर न सिर्फ राज्य के विपक्षी दल बल्कि, आम जन भी आलोचना करने लगे। सोशल मीडिया पर तो मानों ब्रिज निर्माण के मीम्स की बाड़ ही आ गई। हद तो तब हो गई, जब देश के साथ-साथ विदेश तक में इस निर्माण कार्य को अजीबो-गरीब बताया गया। आनन-फानन में सरकार ने न सिर्फ ब्रिज के कर्व को तोड़कर दोबारा से सुगम बनाने का आश्वासन दिया, बल्कि दोषी अफसरों को निलंबित तक कर दिया। वहीं, सोशल मीडिया पर हो रही निर्माण की आलोचना पर लगाम लगाने के लिए ब्रिज के एंट्रेंस पर 10 फीट ऊंची दीवार खड़ी कर चारों और कांटे लगाकर उसे बंद कर दिया गया। साथ ही, दीवार पर लिखा गाया कि वीडियो रिकॉर्ड करने या दीवार पर चढ़ने वाले के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि, सरकार से मिले आश्वासन के करीब डेढ़ साल बाद भी ब्रिज की जमीनी हकीकत जस की तस बनी हुई है। मार्ग से गुजरने वाले वाहन चालक अब भी अन्य वाहनों के दबाव को झेलते हुए यहां से गुजरने को मजबूर हैं। इसके अलावा बोगदा पुल से बरखेड़ी की ओर जाने वाले मार्ग पर मेट्रो का काम भी चल रहा है, जिसकी वजह से मार्ग का बड़ा हिस्सा बंद है। लोगों को जिंसी चौराहे से घूमकर प्रभात चौराहा या एमपी नगर की तरफ जाना पड़ रहा है। ऐसे में अगर समय रहते ब्रिज में सुधार कर इसे लोगों के लिए शुरु कर दिया जाता तो मार्ग से गुजरने वाले वाहन चालकों को थोड़ी कम परेशानियों का सामना होता। बताया जा रहा है कि, कागजों पर तो ब्रिज तैयार है, पर इसे जमीन पर कब उकेरा जाएगा, ये देखने योग्य है?
-लागत: 18 करोड़ रुपये
-लंबाई: 648 मीटर
-चौड़ाई: 8 मीटर
-रेलवे का हिस्सा: 70 मीटर
Updated on:
12 Sept 2026 07:53 pm
Published on:
12 Sept 2026 07:53 pm
