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Bhopal news: ‘मैं नौकरी लगवा दूंगी…’, फर्जी IAS तृप्ति सिंह पर तीसरी FIR दर्ज, सहेली से लिए थे 3 लाख रुपए

Fake IAS officer Tripti Singh Rajput: फर्जी IAS बनकर ठगी करने वाली तृप्ति सिंह राजपूत के खिलाफ तीसरी FIR दर्ज हुई, जिसमें बैतूल निवासी ख्याति धौलपुरे ने 3 लाख रुपये ठगे जाने की शिकायत की है।
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भोपाल

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Astha Awasthi

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Updated: 14 Sep 2026, 7:35 AM IST

फर्जी IAS तृप्ति सिंह (Photo Source - Patrika)

फर्जी IAS तृप्ति सिंह (Photo Source - Patrika)

Bhopal news: फर्जी आइएएस बनकर लोगों से ठगी करने के मामले में गिरफ्तार तृप्ति सिंह राजपूत के खिलाफ तीसरी एफआइआर दर्ज हुई है। इस बार एमपी की बैतूल निवासी और वर्तमान में जहांगीराबाद निवासी ख्याति धौलपुरे (28) ने नौकरी लगवाने के नाम पर 3 लाख रुपए लेने और फर्जी ट्रेनिंग कराने की शिकायत की है। पुलिस ने तृप्ति व उसके साथी के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। ख्याति के अनुसार, उसकी तृप्ति से जून 2024 में मुलाकात हुई थी। तृप्ति ने खुद को नरोन्हा एकेडमी की एचओडी और एमपीटी में एडिशनल डायरेक्टर बताया। बाद में ठगी का अहसास होने पर जब पीड़िता ने पैसे मांगे तो तृप्ति ने पहले टाला, फिर तीन लाख रुपए लौटा दिए।

ट्राइबल म्यूजियम में कराई थी ट्रेनिंग

इस वृप्ति ने ख्याति और उसकी सहेली को भोपाल के ट्राइबल म्यूजियम और मानव संग्रहालय ले जाकर पौधरोपण और भाषण कराया। इस दौरान वीडियो भी बनाए। ख्याति का आरोप है, तृप्ति ने उसे ट्रेनिंग में अधिकारी जैसा आत्मविश्वास दिखाने के लिए पद का नाम बोलने को कहा। बाद में यही वीडियो वायरल होने लगा था।

आरटीआई से सामने आया सच

तृप्ति ने खुद को आइएएस अधिकारी बताकर शादी की थी। शादी के बाद जब ससुर को शक हुआ तो उन्होंने लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (एलबीएसएनएए), मसूरी से आरटीआइ के जरिए जानकारी मांगी। जब वहां से जवाब आया तो आइएएस होने का दावा फर्जी निकला।

घर पर बना रखा था पूरा सेटअप

तृप्ति के ठिकानों से सरकारी लेटरहेड, फर्जी आइडी, नियुक्ति से जुड़े दस्तावेज, प्रशिक्षु आइएएस लिखे स्मृति चिह्न और भारत सरकार लिखी कार जैसी सामग्री मिले है। ससुराल से मिली ट्रेनिंग किट और मसूरी प्रशिक्षण से जुड़ी तस्वीरों को पुलिस ने जांच का हिस्सा बनाया है।

विधानसभा तक का फोटो और वीडियो मिला

तृप्ति कथित तौर पर आइएएस बनकर विधानसभा परिसर जाने का वीडियो सोशल मीडिया में पोस्ट किया था। थाना प्रभारी अमित सोनी ने बताया कि जांच में मोबाइल, डिजिटल उपकरण, बैंक खातों और दस्तावेज की जानकारी जुटाई गई है। डेढ़ करोड़ की ठगी का पूरा हिसाब और इस नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका कड़ी जोडकर जांच की जा रही है।