
भोपाल के नवाब हमीदुल्लाह खान (फोटो सोर्स: Save Culture Heritage Of Bhopal)
Bhopal News : मौजूदा समय में मध्य प्रदेश की राजधानी के तौर पर पहचाने जाने वाले भोपाल को तालाबों, मस्जिदों और नवाबों का शहर भी कहा जाता है। ऐसे में हम बात करते हैं भोपाल रियासत के आखिरी नवाब थे हमीदुल्लाह खान की। नवाब हमीदुल्लाह का पूरा नाम नवाब सिकंदर सौलत इफ्तिखार उल मुल्क बहादुर हमीदु्ल्लाह खान था। इनका जन्म 9 सितंबर 1894 को हुआ था। वो बेगम सुल्तान जहां के तीसरे और आखिरी जीवित पुत्र थे। यही वजह थी कि, सुल्तान जहां बेगम के निधन के बाद वो भोपाल नवाब बनाए गए।
नवाब हमीदुल्लाह खान अपनी पिछली पांच पीढ़ियों में भोपाल के पहले पुरुष शासक बने थे। नवाब बनने से पहले हमीदुल्लाह अपनी मां के मुख्य सचिव नियुक्त किए गए थे। उस समय उनकी मां सुल्तान जहां बेगम ही भोपाल शासन कर रहीं थीं। भोपाल नवाब हमीदुल्लाह खान के जन्मदिवस (9 सितंबर) के मौके पर आज हम जानते हैं उनके शासनकाल से जुड़े कुछ खास किस्से। जैसे- उनके पास न सिर्फ निजी विमान था, जिसे वो खुद उड़ाते थे। साथ ही, पोलो खेल के वो इतने माहिर खिलाड़ी थे कि, उन्होंने दिल्ली, कोलकाता और मुंबई में आयोजित पोलो की कई प्रतियोगिताएं जीती थीं।
09 सितंबर 1894 सर हमीदुल्लाह खान का जन्म हुआ था। 20 अप्रैल 1926 को उन्होंने भोपाल रियासत के 13वें शासक के रूप में कमान संभाली थी। हमीदुल्लाह खान ने अच्छी-खासी तालीम हासिल की थी। वो अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में पढ़ते हुए खिलाफत मूवमेंट में भी एक्टिव रहे। इसके चलते ब्रिटिश सरकार सर हमीदुल्लाह खान के नवाब बनने में अड़चन लगा रही थी।' उस वक्त भोपाल रियासत में सुल्तान जहां बेगम का शासन था, वो अपने बेटे हमीदुल्लाह खान को नवाब बनाने के लिए किंग जॉर्ज पंचम से मिलने इंग्लैंड गईं। उनकी पैरवी के बाद ही हमीदुल्लाह खान भोपाल का नवाब बनाया जा सका।
हमीदुल्लाह खान एक अच्छे पायलट के तौर पर पूरे हिंदुस्तान में फेमस थे। उनके पास प्लेन उड़ाने का कमर्शियल लाइसेंस भी था। उन्होंने साल 1944 में पायलट की ट्रेनिंग पूरी की और इसी साल आधिकारिक कमर्शियल पायलट का लाइसेंस भी प्राप्त किया था। इसके बाद वो खुद अपना निजी विमान उड़ाते थे। इतिहास के जानकारों की मानें तो उनके पास खुद का 3 या 4 सीटर निजी विमान था। वे अपने इस विमान को भोपाल से अपने निजी फार्म हाउस यानी चिकलोद (चिकलोद कोठी) के बीच उड़ाते थे। उन्होंने चिकलोद स्थित उनके फार्म हाउस परिसर में ही एक छोटा रनवे भी बनाया हुआ था, जहां वे अपना विमान को उतारा करते थे। विमान चलाने के अलावा, वे द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी और इटली के खिलाफ मोर्चों पर भी सक्रिय रूप से शामिल रहे थे।
भोपाल नवाब हमीदुल्लाह खान पोलो के एक बहुत ही शौकीन और बेहतरीन खिलाड़ी माने जाते थे। अपने इसी कुशल खेल के चलते उन्होंने दिल्ली, कोलकाता और मुंबई जैसे बड़े शहरों में होने वाली पोलो प्रतियोगिताओं में न सिर्फ अकसर हिस्सा लिया, बल्कि कई बार उन प्रतियोगिताओं को जीता भी। पोलो के अलावा उन्हें शिकार, हॉकी टूर्नामेंट और शानदार पार्टियों का भी बहुत शौक था।
नवाब मोहम्मद हमीदुल्लाह खान सितंबर 1930 से अप्रैल 1935 तक अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) के कुलाधिपति यानी (चांसलर) रहे थे। इससे पहले उनकी मां सुल्तान जहां बेगम दिसंबर 1920 से मई 1930 के बीच अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की पहली चांसलर रही थीं। उनके निधन के बाद नवाब हमीदुल्लाह खान को एएमयू का दूसरा चांसलर चुना गया। नवाब हमीदुल्लाह खान की शुरुआती शिक्षा एमएओ कॉलेज (जो अब अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी है) में ही हुई थी। इसी के चलते उन्होंने साल 1905 में यहां से स्नातक किया और बाद में इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से 1915 कानून की डिग्री हासिल की थी। यही नहीं, इसके अलावा दो बार (1931 और 1944 में) 'चैंबर ऑफ प्रिंसेस' के भी चांसलर रहे थे।
नवाब हमीदुल्लाह खान ने दो शादियां की थीं। उनका पहला निकाह 05 सितंबर 1925 को मैमूना सुल्तान शाह बानो बेगम से हुआ था। मैमूना सुल्तान अफगानिस्तान के शाह शुजा की परपोती थीं। उनसे तीन बेटियां थीं, जिनके नाम बेगम आबिदा सुल्तान, बेगम साजिदा सुल्तान और बेगम राबिया सुल्तान था। इसके बाद साल 1947 में नवाब हमीदुल्लाह खान ने आफ़ताब जहां बेगम से दूसरी शादी की। इनसे उन्हें एक बेटी थीं, जिनका नाम फरजाना बेगम था।
Updated on:
08 Sept 2026 09:52 pm
Published on:
08 Sept 2026 09:52 pm
