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भोपाल की बेशकीमती 8.28 हेक्टेयर जमीन को निजी हाथों में देने की तैयारी, 800 पेड़ों पर संकट

Bhopal Professor Colony Land Controversy: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में प्रोफेसर कॉलोनी की 8.28 हेक्टेयर जमीन फिर चर्चा में है। मास्टर प्लान 2047 में भी लैंडयूज पीएसपी रखने पर सवाल उठ रहे हैं।
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भोपाल

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Akash Dewani

•

Oct 22, 2026

bhopal professor colony land controversy master plan 2047

Professor Colony Land Controversy: भोपाल में फिर गरमाया 8.28 हेक्टेयर जमीन का विवाद (फोटो सोर्स- Patrika)

Bhopal Professor Colony Land Controversy: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की प्रोफेसर कॉलोनी की 8.28 हेक्टेयर जमीन का विवाद फिर गरमा गया है। डेढ़ साल पहले इस जमीन का उपयोग बदलकर 'पीएसपी' (यानी स्कूल, कॉलेज, अस्पताल आदि के लिए) कर दिया गया था, ताकि यहां नया कलेक्ट्रेट भवन बनाया जा सके लेकिन पिछले साल अक्टूबर में जनप्रतिनिधियों विरोध के कारण कलेक्ट्रेट भवन का प्रोजेक्ट यहां से रद्द कर दिया गया।

अब तक बदला नहीं गया लैंडयूज

नियमानुसार जिस प्रोजेक्ट के लिए जमीन का उपयोग बदला गया था, जब वह प्रोजेक्ट ही वहां से हट गया है, तो जमीन का लैडयूज वापस 'आवासीय' कर देना चाहिए था, लेकिन प्रशासन ने ऐसा नहीं किया। अब मास्टर प्लान 2047 में भी इस जमीन को 'पीएसपी' ही रखा जा रहा है। आशंका जताई जा रही है कि बाद में इस जमीन को स्कूल, कॉलेज या अस्पतालों के नाम पर निजी कंपनियों को सौंपा जा सकता है। पूरी जमीन पर 40 साल पुराने करीब 800 पेड़ है।

मोतिया तालाब जैसा होगा हाल

प्रोफेसर कॉलोनी छोटे तालाब किनारे हैं। कलेक्ट्रेट भवन प्रोजेक्ट के लिए भी मामला एनजीटी पहुंचा था और 800 से अधिक 40 साल पुराने पेड़ काटे जाने के साथ ही वेटलैंड रूल्स उल्लंघन का मामला बना था। एनजीटी ने अपने निर्णय में 50 मीटर का बफर जोन छोड़ने के निर्देश दिए थे, जिसके बाद डिजाइन बदली थी। पर्यावरणविद् डॉ. सुभाष सी पांडेय के अनुसार गई किनारे पुराने शहर में मोतिया तालाब किनारे जिस तरह अस्पताल लाइन से बन गए और अब ये तालाब अंतिम सांस गिन रहा है, ठीक वैसा ही छोटे तालाब होने की आशंका है। आर्किटेक्ट अतुल श्रीवास का कहना है कि जिस प्रोजेक्ट के लिए लैंडयूज बदला गया था, जब वह प्रोजेक्ट ही शिफ्ट हो गया तो लैंड्यूज भी बदलकर आवासीय कर देना चाहिए।

ये सरकारी कार्यालयों के भवन हटाएं रहे

क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य सेवाएं

मलेरिया नियंत्रण अधिकारी

निर्भया होम के चार भवन

एनसीसी नेवल विंग को एमवीएम कॉलेज में एनसीसी आर्मी विंग के पास

पीडब्ल्यूडी भंडार सिविल व विद्युत

सर्किट हाउस लोक निर्माण विभाग को नया स्टेट गेस्ट हाउस बनने के बाद विस्थापित करेंगे।

चीफ इंजीनियर चंबल बेतवा बेसिन नर्मदा भवन में

गीतांजलि कामकाजी महिला छात्रावास को टैगोर हॉस्टल में शिफ्ट ।

कार्यपालन यंत्री विद्युत जल संसाधन को नर्मदा भवन में

रीडेंसीफिकेशन में 139 भवन शामिल किए थे।

अब तक नहीं आया नया प्रस्ताव

प्रशासन के प्रस्ताव से लैंडयूज बदला गया था। अब नया प्रस्ताव आता है तो उसे तय नियमों के तहत प्रक्रिया में लिया जाएगा। अभी मास्टर प्लान में भी आपत्तियां लग रही है। इसमें कमेटी सुनवाई करेंगी और उसके बाद निर्णय होगा।- नीरज आनंद लिखार, संयुक्त संचालक, टीएंडसीपी

45 मीटर चौड़े मार्ग के विरोध में निकालेंगे रैली

भोपाल विकास योजना-2047 से 45 मीटर चौड़े मार्ग को हटाने के लिए ग्राम मिसरोद के रहवासी आज वाहन रैली निकालकर विरोध प्रदर्शन करेंगे और ग्राम निवेश विभाग कार्यालय तक पहुंचेंगे। दरअसल योजना के तहत ग्राम मिसरोद की पुरानी व घनी आबादी के बीच खसरा क्रमांक 205 से होकर यह सड़क बनाने का प्रस्ताव है। ग्रामीणों के मुताबिक, यह मार्ग रेलवे पुलिया के पास स्थित खसरा क्रमांक 29 एवं 30 से होते हुए ग्राम आबादी के खसरा क्रमांक 205 और आगे नर्मदापुरम रोड स्थित खसरा क्रमांक 366/274 तक प्रस्तावित है।

रहवासियों का कहना है कि प्रस्तावित मार्ग के क्षेत्र में वर्ष 1990 से पहले और उसके आसपास विकसित पुरानी ग्राम आबादी मौजूद है। यहां परिवार लंबे समय से निवास कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि प्रस्तावित मार्ग के क्षेत्र में शासकीय अस्पताल मिसरोद, सेवा सहकारी समिति, लोक निर्माण विभाग का गेस्ट हाउस, राष्ट्रीय राजमार्ग से संबंधित कार्यालय, प्राचीन मंदिर और पाटीदार समाज का सामाजिक एवं मांगलिक प्रांगण स्थित हैं।