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बच्चों की आंखों में कैंसर के शुरुआती संकेत, भोपाल में विशेषज्ञों ने बताई पहचान की अहम जानकारी

Children Eye Cancer Early Signs: भोपाल में विशेषज्ञों ने बच्चों की आंखों के कैंसर को लेकर अहम जानकारी साझा की। डॉक्टरों ने शुरुआती संकेतों की पहचान और आधुनिक उपचार के महत्व पर जोर दिया।
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भोपाल

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Akash Dewani

Aug 31, 2026

children eye cancer early signs experts

Children Eye Cancer Early Signs: भोपाल में आयोजित एमपी स्टेट चैप्टर कॉन्फ्रेंस-2026 कैंसर के उपचार पर मंथन (फोटो सोर्स- Magnific)

Children Eye Cancer Symptoms: मध्य प्रदेश के भोपाल में आयोजित एसीओआइएन एमपी स्टेट चैप्टर कॉन्फ्रेंस-2026 में देश विदेश के नेत्र विशेषज्ञों ने बच्चों की आंखों में होने वाले कैंसर और दूसरी बीमारियों के उपचार पर विचार मंथन किया। सम्मेलन में एम्स दिल्ली की नेत्र विशेषज्ञ ड़ॉ. राधिका टंडन और हैदराबाद की डॉ. सुभद्रा जलाली सहित अन्य विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। विशेषज्ञों ने कहा कि बच्चे की आंखों की रोशनी बचाने के लिए शुरुआती जांच अहम भूमिका निभाती है । खासकर समय से पहले और कम वजन में जन्मे नवजातों में रेटिना की बीमारी आरओपी अंधेपन का कारण बन सकती है। इनका समय पर स्क्रीनिंग और इलाज बेहद जरूरी है। सम्मेलन की अध्यक्षता एम्स भोपाल की नेत्र विशेषज्ञ डॉ. भावना शर्मा ने किया। कुपोषण और विटामिन-ए की कमी से होने वाली रतौंधी व कॉर्निया की गंभीर क्षति से बचाव भी सम्मेलन का अहम विषय रहा।

रेटिना से लेकर बच्चों के कैंसर तक चर्चा

सम्मेलन में शामिल नेत्र विशेषज्ञ ने बच्चों में अंधापन की रोकथाम पर विशेषज्ञ आरओपी की स्क्रीनिंग, लेजर और एंटी-वीईजीएफ उपचार पर अनुभव और विचार शोध साझा किया। जन्मजात या चोट से होने वाले बच्चों के मोतियाबिंद में समय पर सर्जरी और आधुनिक आइओएल प्रत्यारोपण पर भी विचार मंथन किया। विशेषज्ञ बच्चों में मोबाइल और डिजिटल स्क्रीन के अत्यधिक इस्तेमाल से बढ़ते मायोपिया, आंखों के सूखेपन और तनाव और रेटिनोब्लास्टोमा जैसे आंखों के कैंसर की शुरुआती पहचान और दृष्टि बचाने वाले उपचार बताए।

बच्चों में कैंसर की शुरुआती पहचान पर जोर

बच्चों में कैंसर के शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य बीमारी जैसे दिखाई देते हैं। इन्हें नजरअंदाज करना इलाज में देरी का कारण बन सकता है। एम्स ने इस बारे में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) से जुड़े सामुदायिक चिकित्सा अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया। संस्थान के बाल रोग विभाग के प्रोफेसर एवं बाल रक्त रोग-कैंसर विशेषज्ञ डॉ. नरेंद्र कुमार चौधरी और डीएम बाल रक्त रोग-कैंसर रेजिडेंट डॉ. मेघा धवन ने सामुदायिक चिकित्सा अधिकारियों को बच्चों में कैंसर की शुरुआती पहचान के बारे में बताया। प्रशिक्षण का आयोजन कैंकिड्स-किड्सकैन ने किया। डॉ. नरेंद्र कुमार चौधरी और डॉ. मेघा धवन ने बताया कि बच्चों में कैंसर की जितनी जल्दी पहचान होगी, उपचार के सफल होने की संभावना उतनी ही अधिक होगी।