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अध्यात्म के नाम पर आश्रम में होता था दूसरा काम, ओशो की शिष्या ने किया था बड़ा खुलासा

Osho Story : पत्रिका.काम पर पढ़ें ओशो की शिष्या मां आनंद शीला की किताब 'डोंट किल हिम! द स्‍टोरी ऑफ माई लाइफ विद भगवान रजनीश' के अंशों के आधार उनकी विवादित जिंदगी से जुड़ी प्रमुख बातें
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भोपाल

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deepak deewan

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Updated: 3 Nov 2026, 10:15 AM IST

ओशो

ओशो image patrika

Osho Story : मध्यप्रदेश में जन्मे आचार्य रजनीश उर्फ ओशो को दुनियाभर में जबर्दस्त ख्याति मिली। 70 से 80 के दशक के दौरान आध्यात्मिक नेता के रूप में लोग उन्हें पूजने तक लगे थे। हालांकि ओशो जीवनभर विवादित बने रहे। उनके साथ कई वर्षों तक रहीं शिष्या मां आनंदशीला ने एक किताब लिखी। इसमें ओशो के आश्रमों की गतिविधियों का खुलासा किया गया था। मां आनंदशीला ने अपनी किताब डोंट किल हिम! द स्‍टोरी ऑफ माई लाइफ विद भगवान रजनीश' में लिखा कि अध्यात्म के नाम पर आश्रम में सेक्स की मंडी लगाई जाती थी। ओशो स्वयं भक्तों को कहा करते थे कि सेक्स की इच्छा नहीं दबाना चाहिए, इससे विकार उत्पन्न होते हैं।

' डोंट किल हिम! द स्‍टोरी ऑफ माई लाइफ विद भगवान रजनीश' किताब 2013 में आई थी। इस किताब में ओशो की शिष्या मां आनंदशीला ने कई विवादित दावे किए। उन्होंने कहा है कि आश्रम में खुलेआम सेक्स होने लगा था। इस बात की ही सबसे ज्यादा चर्चा होती थी।

मां आनंदशीला ने अपनी किताब में लिखा:

ओशो से लोग बहुत प्रभावित थे। वे बीमारी में भी आश्रम में काम करते रहते थे। खुद की भी परवाह नहीं करते थे। यहां तक कि रात में सो तक नहीं पाते थे। एक दौर ऐसा आया कि आश्रम के चारों तरफ गंदगी फैल गई। यहां के संन्यासी कई बीमारियों से ग्रसित हो गए थे। वे कमजोर हो गए। इसके सन्यासी सेक्स करते रहते थे।

आनंदशीला ने किताब में लिखा है कि मुझे यह देखकर बड़ा आश्चर्य हुआ कि सारा दिन काम करने के बाद भी संन्यासी सेक्स के लिए उर्जा और समय कैसे निकाल लेते ‌हैं। ओशो के प्रभाव के कारण उनपर कोई फर्क नहीं पड़ता था। आश्रम में जो शिविर होते थे, उसमें सबसे ज्यादा चर्चा का विषय सेक्स ही होता।

रायसेन जिले में हुआ था जन्म

ओशो का जन्म मध्यप्रदेश के रायसेन जिले के कुचवाडा गांव में हुआ था। वे दुनियाभर में आचार्य रजनीश के रूप में लोकप्रिय हो गए थे। अपने शिखर दिनों में ओशो को अपने आप को भगवान श्री रजनीश के नाम से पुकारा जाना बहुत अच्छा लगने लगा था। खुद को भगवान कहलवाने पर जब विवाद बढ़ने लगा उन्होंने अपना नाम 'ओशो' कर लिया था।