
IAS Santosh Verma (photo source : Patrika)
Santosh Verma : मध्यप्रदेश अनुसूचित जाति-जनजाति अधिकारी एवं कर्मचारी संघ (अजाक्स) संगठन में वर्चस्व की लड़ाई बरकरार है। प्रांतीय अध्यक्ष पद को लेकर IAS संतोष वर्मा और मुकेश मौर्य व उनके समर्थक एक दूसरे से भिड़ रहे हैं। लंबे समय से चल रहा यह विवाद एक बार फिर पुलिस तक पहुंचा है। दोनों गुटों पर एफआइआर दर्ज करने की मांग की गई है। भोपाल पुलिस ने अभी जांच की बात कही है। किसी के भी खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की है।
मप्र अनुसूचित जाति जनजाति अधिकारी कर्मचारी संघ (अजाक्स) के दो गुटों के बीच जारी लगाई और तेज हो गई है। आइएएस संतोष वर्मा गुट ने पुलिस कमिश्नर से मुलाकात कर मुकेश मौर्य के खिलाफ एफआइआर दर्ज करने की मांग की है। उनपर न्यायालयीन आदेश के बावजूद अजाक्स के नाम, पंजीयन व लेटरहेड का उपयोग करने, आर्थिक अनियमितता करने संबंधी आरोप लगाए।
अजाक्स के कार्यवाहक अध्यक्ष एसएल सूर्यवंशी ने बताया कि मुकेश मौर्य ने फर्जी तरह से संगठन की सदस्यता ली, पद पर कब्जा कर गंभीर आर्थिक अनियमितता की। कोर्ट ने केस दर्ज करने के आदेश दिए हैं। इस पर प्रतिनिधि मंडल ने पुलिस से हस्तक्षेप कर कार्रवाई की मांग की।
मुकेश मौर्य खुद को अजाक्स का वैध प्रांताध्यक्ष बताते हैं। उनका उल्टा आरोप है कि IAS संतोष वर्मा प्रांतीय अध्यक्ष नहीं हैं और वे अजाक्स संगठन के नाम तथा बैनर का अनाधिकृत व गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। मुकेश मौर्य व उनके धड़े ने संतोष वर्मा का फर्जी IAS और फर्जी प्रांताध्यक्ष बताया है। उन पर अजाक्स को बदनाम करने और समाज में भ्रम फैलाने के आरोप लगाए हैं।
संतोष वर्मा और उनके समर्थकों ने मुकेश मौर्य और उनके साथियों पर कूटरचित (फर्जी) दस्तावेज तैयार कर अवैध रूप से संगठन पर कब्जा करने का आरोप लगाया। हाल ही में न्यायालय के आदेश के पालन के लिए मुकेश मौर्य के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज किए जाने की मांग को लेकर पुलिस अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंपे।
संतोष वर्मा का विवादों से पुराना नाता है। उनपर कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर IAS बनने का आरोप है। नवंबर 2025 में अजाक्स के अधिवेशन में IAS संतोष वर्मा ने सवर्ण समाज और ब्राह्मण की बेटियों को लेकर एक टिप्पणी की जिसपर बवाल मच गया था। राज्य सरकार ने उन्हें निलंबित कर केंद्र को उनकी बर्खास्तगी का प्रस्ताव भी भेजा था।
संतोष वर्मा पर प्रमोशन लेने के लिए फर्जी दस्तावेज पेश करने के आरोप हैं। वे नगरीय प्रशासन विभाग में पदस्थ थे। तब IAS कैडर अलॉट होने पर DPC के लिए स्पेशल जज (CBI और व्यापमं) विजेंद्र रावत के फर्जी साइन कर रिपोर्ट तैयार की। संतोष वर्मा की IAS संवर्ग में नियुक्ति में फर्जीवाड़े का यह मामला विधानसभा में भी गूंजा था।
तत्कालीन उप नेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे के सवाल पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सदन में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संतोष वर्मा ने 6 अक्टूबर 2020 को न्यायालय द्वारा दिए गए दोषमुक्ति आदेश के आधार पर अपनी संनिष्ठा प्रमाणित कराई थी। इस आधार पर उन्हें पदोन्नत कर दिया गया था। बाद में हर्षिता अग्रवाल ने 28 अप्रैल 2021 को मुख्य सचिव को शिकायत कर आरोप लगाया गया कि संतोष वर्मा ने कूटरचित न्यायालयीन आदेश प्रस्तुत कर लंबित प्रकरणों की झूठी जानकारी दी। तब सामान्य प्रशासन विभाग ने मामला इंदौर पुलिस को सौंप दिया। पुलिस जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि 6 अक्टूबर 2020 का कथित न्यायालयीन आदेश वास्तव में पारित ही नहीं हुआ था। इसे फर्जी पाए जाने के बाद संतोष वर्मा के खिलाफ अपराध क्रमांक 155/2021 दर्ज किया गया। पुलिस ने 10 जुलाई 2021 को संतोष वर्मा को गिरफ्तार किया। 27 जनवरी 2022 को सर्वोच्च न्यायालय से उन्हें जमानत मिल सकी।
वर्तमान में संतोष वर्मा के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण क्रमांक 851/2016 न्यायालय में विचाराधीन है।
Updated on:
09 Sept 2026 12:56 pm
Published on:
09 Sept 2026 10:28 am
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