अधूरे निर्माण पर रजिस्ट्री करवाई लेकिन आवास नहीं दिया, अब 14 फीसदी ब्याज से पैसा लौटाना पड़ेगा

दो अलग-अलग मामलों में बिल्डरों के खिलाफ दिया उपभोक्ता फोरम ने आदेश

By: Radhyshyam dangi

Updated: 03 Mar 2019, 07:43 AM IST

भोपाल. भोपाल के दो नामी बिल्डरों ने ग्राहकों से आवासीय प्रोजेक्ट में ग्राहकों को मकान के बदले पूरा पैसा ले लिया, लेकिन आज तक पजेशन नहीं दिया। एक बिल्डर ने तो पैसे बचाने के चक्कर में निर्माणाधीन भवन की रजिस्ट्री करवाकर हाथ खींच लिया। पैसा पूरा ले लिया, लेकिन आज तक पजेशन नहीं दिया। वहीं दूसरे नामचीन बिल्डर ने फ्लैट की पूरी कीमत वसूल ली, लेकिन आज तक मौके पर निर्माण कार्य तक शुरु नहीं किया।

यह मामला उपभोक्ता फोरम पहुंचा तो एक बिल्डर तो अपना पक्ष रखने के लिए उपस्थित तक नहीं हुआ। वहीं दूसरे बिल्डर ने ग्राहक से पूरा पैसा लेकर तर्क दिया कि ग्राहक ने रहने के लिए नहीं बल्कि निवेश करने की दृष्ठि से फ्लैट खरीदा था, इसलिए ग्राहक को कोई नुकसान नहीं हुआ। यही नहीं यह तक तर्क देकर मुकरने की कोशिश कि की निवेश के लिहाज से फ्लैट खरीदा गया था, इसलिए उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम तहत क्रेता उपभोक्ता की श्रेणी में नहीं आता है। हालांकि उपभोक्ता फोरम ने बिल्डर के बेतूके तर्कों को सिरे से खारिज कर दिया।

 

केस-१ पिपलानी निवासी अगम गुप्ता आत्मज वीएस गुप्ता ने २०१२ में १२ लाख रुपए में फ्लेट बुक किया। बुकिंग दिनांक से ३० महीने के भीतर वादा बिल्डर ने किया।

लेकिन आंवटन लेटर में पजेशन की तारीख नहीं बताई। यह भी नहीं बताया कि कितने दिनों में फ्लेट का कब्जा दिया जाएगा। क्रेता ने एचडीएफसी बैंक से करीब १० लाख का लोन लेकर २०१३ में ही पैसा चुका दिया। बाद में बिल्डर ने गुप्ता को लिखित में कहा कि दिसंबर, २०१४ तक पजेशन देंगे। ४३ महीने बाद भी फ्लेट का पजेशन नहीं दिया। बिल्डर ने २०१४ तक तो प्रोजेक्ट का काम शुरु नहीं किया। इस पर गुप्ता ने बिल्डर को नोटिस भेजा। क्रेता ने बैंक लोन कि ४ लाख ७९ हजार रुपए किस्ते भी चुका दी। लेकिन फ्लेट नहीं मिला।

बिल्डर के बेतूके तर्क-
- बिल्डर ने फोरम में अजीब तर्क देकर प्रकरण को कमजोर करने की कोशिश की। बिल्डर ने कहा कि गुप्ता ने फ्लैट निवास करने के उद्येश्य से नहीं, बल्कि निवेश के लिए किया था। इसलिए उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धाराए २ डी के तहत क्रेता उपभोक्ता की श्रेणी में नहीं आता है।

- क्रेता ने फोरम के सामने सही तथ्य पेश नहीं किए है। जिस ब्लॉक में क्रेता का फ्लैट था, उसमें पर्याप्त बुकिंग नहीं होने के कारण काम में देरी हुई है। यह भी तर्क दिया है कि क्रेता ने पूरा पैसा नहीं दिया है, इसलिए पजेशन भी नहीं दिया गया है।
- कहा कि यदि बुकिंग निरस्त की जाती है या पैसा वापस करवाया जाता है तो इससे बिल्डर को नुकसान होगा।

निर्णय- क्रेता द्वारा अंतिम किस्त चुकाने की दिनांक से १४ फीसदी ब्याज दर से पूरा पैसा लौटाया जाए। साथ ही १० हजार रुपए क्षतिपूर्ति भी दी जाए।

 

केस- २
गांधी नगर निवासी अरुण कुमार पटेल आत्मज सुरेंद्र कुमार ने बुंदेलखंड को-ऑपरेटिव सोसायटी में एक बिल्डर से २०१० में २ बीएचके फ्लेट बुक किया था। कीमत ११लाख २५ हजार रुपए बताई गई। बुकिंग के समय पत्र भी लिखकर दिया गया। बुकिंग के बाद पटेल ने किस्तों से ८ लाख ६९हजा रुपए चुका दिए। फ्लैट का निर्माण १८ महीने में पूरा करना था, लेकिन २०१२ में अधूरे निर्माण पर ही ६ लाखा ३३ हजार रुपए मूल्य बताकर रजिस्ट्री करवा दी। समय पर भवन का काम पुरा नहीं किया। क्रेता ने कई बार निवेदन किया, लेकिन बिल्डर ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।

बिल्डर ने नोटिस का भी जवाब नहीं दिया
फोरम ने बिल्डर को नोटिस दिया, लेकिन वह उपस्थित नहीं हुए। इसके चलते फोरम ने एक पक्षीय कार्रवाई करते हुए एक पक्षीय निर्णय पारित कर दिया। न ही फोरम में खरीददार द्वारा लगाए गए आरोपों का खंडन किया।

निर्णय- दो महीने के भीतर फ्लैट का निर्माण पूरा कर पजेशन सौंपा जाए। फ्लैट नहीं दिया जाता है तो १४ फीसदी ब्याज सहित पैसा लौटाया जाए। साथ ही २० हजार रुपए क्षतिपूर्ति भी देवें।

क्या-क्या सावधानी बरतें

- ग्राहक-बिल्डर के बीच हर बातचीत लिखित में ही करें। मौखिक वादों पर भरोसा न करें।
- कुछ पैसे बचाने के एवज में निर्माणाधीन भवनों की रजिस्ट्री नहीं करवाएं।

- किसी भी खाली पेपर अथवा बिना पढ़े किसी पेपर पर साइन न करें। संतुष्ठी प्रमाण पत्र तब ही देवें जब संतोषजनक काम हो गया हो।
- जितने भी पत्राचार, भवन आदि का ब्रोशर, पंपलेट आदि संभालकर रखे।

Radhyshyam dangi Reporting
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