वायरोलॉजी लैब
कब से बन रही : 2010
लागत : करीब 25 करोड़ रुपए
यह होगा फायदा : स्वाइन फ्लू और इबोला के लिए जिम्मेदार वायरस समेत अन्य की जांच हो सकेगी। स्वाइन फ्लू के नमूनों को जबलपुर और ग्वालियर भेजने की मजबूरी खत्म हो जाएगी। रिपोर्ट एक दिन में मिल जाएगी, जिससे मरीजों का इलाज जल्द शुरू हो सकेगा।
एमआरआइ जांच
कब से बन रही : 2015
लागत : करीब 5 करोड़ रुपए
यह होगा फायदा सीटी स्कैन के बाद एमआरआइ मशीन के इंस्टॉलेशन का काम लगभग पूरा हो चुका है। इससे सभी तरह के कैंसर के साथ हार्ट, किडनी, पेट, हड्डियां और मस्तिष्क की गहन जांच हो सकेगी। बाजार में इस जांच लिए पांच से १५ हजार रुपए तक देने होते हैं।
एडवांस एंजियोग्राफी
कब से बन रही : 2012
लागत : करीब 2 करोड़ रुपए
यह होगा फायदा: मौजूदा कैथलैब १५ साल पुरानी है, जो बार-बार खराब हो जाती है। एेसे मंे दिल की जांच के लिए मरीजों को यहां-वहां भटकना पड़ता है। इस एडवांस मशीन से एंजियोग्राफी पहले के मुकाबले जल्दी होगी, वहीं रिपोर्ट भी ज्यादा सटीक मिलेगी।
नया ब्लडबैंक : ब्लड बैंक को नई ओपीडी में शिफ्ट किया जा रहा है। इससे ट्रॉमा में आने वाले मरीजों को ब्लड के लिए परेशान होना नहीं पड़ेगा। 15 दिन में यह शुरू हो जाएगा।
मल्टीलेवल पार्किंग : अस्पताल में दो मल्टीलेवल पार्किंग अगले महीने तक शुरू हो जाएंगी। इसमें 250 चार पहिया वाहन और 2500 दो पहिया वाहन खडे़ हो सकेंगे। इसकी जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी।