
जेल में दिखी भाईचारे की मिसाल, आधी रात को रोज़ेदार मुस्लिम कैदियों के लिए सहरी बनाते हैं हिंदू कैदी
भोपाल/ एक तरफ जहां कोरोना वायरस के चलते लोग दुनियाभर में लोग रमजान की इबादत अपने घरों में रहकर ही करने को मजबूर है। हालात ये हैं कि, संक्रमण से बचने के लिए लोग एक दूसरे से सोशल डिस्टेंस मेंटेन किये हुए हैं। इस तरह सब अपनी अपनी सुरक्षा करने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे हालात में भोपाल सेंट्रल जेल से हिंदू-मुस्लिम भाई चारे की मिसाली तस्वीर सामने आई है।
500 मुस्लिम रोजेदार कैदियों की सेवा कर रहे हैं 150 हिन्दू कैदी
वैसे तो जेल एक मुजरिम का ठिकाना है, जहां बुराई को कैद किया जाता है, लेकिन इस मुश्किल की घड़ी में कैदियों के बीच भाईचारा देखने को मिला। दरअसल, रमजान का पवित्र महीना चल रहा है। ऐसे में जेल के अंदर मौजूद 150 हिंदू कैदी, आधी रात को उठकर मुस्लिम कैदियों के लिए सहरी के लिए भोजन तैयार करते हैं। यहीं नहीं, ये हिन्दू कैदी रोज़दारों के लिए शाम को इफ्तार भी तैयार करते हैं। बता दें कि, भोपाल सेंट्रल जेल में करीब 3000 कैदी बंद हैं। इनमें 500 कैदी मुस्लिम हैं, जो रमजान के रोजे रख रहे हैं। इन रोजों के दौरान यहां मौजूद कैदियों में से करीब 150 हिन्दू कैदी उनकी हर जरूरत का ध्यान रख रहे हैं।
जेल प्रबंधन भी रख रहा रोज़दारों का ख्याल
जेल प्रबंधन के मुताबिक, आम दिनों में तो बाहरी संस्थाएं ही त्योहार के दिनों में कैदियों के लिए जरूरी चीजों का इंतेजाम कर लेती है। इसी तरह रमज़ान के दिनों में संस्थाएं सेहरी और इफ्तारी की व्यवस्था करते हैं। लेकिन लॉकडाउन के चलते किसी भी संस्था द्वारा जेल में सामान लाने पर प्रतिबंध है। ऐसे हालात में जेल प्रबंधन ही इन मुस्लिम कैदियों की जरूरत का पूरा ख्याल रख रहा है।
सेहरी और इफ्तार में दी जा रही हैं ये चीजें
रोजेदार कैदियों के लिए रात 3:00 बजे से सहरी का इंतेजाम किया जाता है। इस सहरी में इन कैदियों को चाय और रोटी दी जाती है। साथ ही, शाम को इफ्तारी का जिम्मा भी इन हिंदू कैदियों का ही है। इफ्तारी में इन्हें तरबूज, मौसमी फल, खजूर और दूध दिए जाते हैं। हालांकि, खाना बनाने और नमाज पढ़ने के दौरान सोशल डिस्टेंस का पालन किया जाता है। मुस्लिम कैदियों को खाने में दाल चावल, सब्जी और रोटी दी जाती है।
मुस्लिम कैदियों की नमाज की व्यवस्था
भोपाल जेल में 29 सिमी के आरोप में भी बंद है। इन्हीं कैदियों को आम कैदियों के साथ रहने की इजाजत नहीं है। बाकि, सभी कैदी सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए मुस्लिम कैदी जेल में ही नमाज अदा करते हैं। जेल अधीक्षक दिनेश नरगावे के मुताबिक, रोजे के दौरान मुस्लिम कैदियों को कोई दिक्कत न हो, इसकी पर्याप्त व्यवस्था की गई है। जेल मैन्युअल के हिसाब से सभी कैदियों को खाना दिया जाता है। नमाज अदा करने के लिए एक हॉल में व्यवस्था की गई है।
Published on:
09 May 2020 06:15 pm
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