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कश्मीरी पंडितों को उनका घर मिले, इसके लिए पूरे देश को उनका दर्द समझना होगा

यंग थिंकर्स फोरम के रीडिंग क्लब का पुस्तक पर चर्चा कार्यक्रम का आयोजन
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Kashmiri Pandit

कश्मीरी पंडितों को उनका घर मिले, इसके लिए पूरे देश को उनका दर्द समझना होगा

भोपाल। यंग थिंकर्स फोरम द्वारा रविवार को कोटरा में साप्ताहिक पुस्तक चर्चा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में 4 पुस्तकों पर चर्चा की गई। 2006 से 2010 तक भारतीय गृह मंत्रालय में अवर सचिव रहे आरवीएस मणि की पुस्तक द मिथ ऑफ हिन्दू टेरर की समीक्षा करते हुए स्पर्श चतुर्वेदी ने बताया कि किस तरह तत्कालीन सरकार द्वारा हिन्दू आतंकवाद को गढऩे की कोशिश की गई।

चर्चा के दौरान यह भी बताया कि किस तरह तुष्टिकरण की राजनीति के लिए डेविड हेडली के उस बयान को सरकार द्वारा छुपाया गया, जिसमें उसने इशरत जहां के लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े होने की बात स्वीकार की थी। तमाम इंटेलिजेंस होने के बावजूद सरकार 26/11 के हमले से पहले सुरक्षा में कोताही बरतती है। हिन्दू आतंकवाद की परिकल्पना तुष्टिकरण के लिए गढ़ी गई थी और इसका वास्तविकता से कोई रिश्ता नहीं है ।

इतिहासकारों ने किया है भारतीय इतिहास से खिलवाड़
अरुण शौरी की पुस्तक एमिनेंट हिस्टोरियंस देयर टेक्नोलॉजी देयर लाइफ देयर फ्रॉड की समीक्षा करते हुए अर्चना शर्मा ने बताया की किस तरह इतिहासकारों ने भारत के इतिहास के साथ खिलवाड़ किया। इस पुस्तक में अरुण शौरी भारतीय इतिहासकारों द्वारा सच को छुपाने और सरकारी पैसे गलत तरह से लेने का आरोप लगाते हुए अपनी बात रखते हैं।

अंकित कुमार ने वीर सावरकर की पुस्तक 1857 की स्वातंत्र समर की समीक्षा करते हुए 1857 को स्वतंत्रता संघर्ष और देश के लिए सावरकर के योगदान के विषय में बताया। वहीं, गोविंद कुमार सिंह ने 'सिद्धार्थ गिगू और वरद शर्मा' द्वारा संपादित किताब ए लांग ड्रीम ऑफ होम की समीक्षा करते हुए कश्मीर घाटी में कश्मीरी पंडितों के साथ हुई हिंसा और उनके विस्थापन की कहानी बताई। गोविंद कुमार ने कहा कि आज कश्मीरी पंडितों को उनका घर वापस मिले इसके लिए जरूरी है की पूरा हिंदुस्तान उनके दर्द को समझे।