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MP के ​इन कॉलेजों से वापस ले लिया जाएगा दर्जा, जानिये क्यों?

यूजीसी ने सख्त किए ऑटोनोमस के नियम, ये कॉलेज नहीं रख सकेंगे 10% से ज्यादा कांट्रेक्ट फैकल्टी...
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भोपाल

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Deepesh Tiwari

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Updated: 26 Jan 2018, 2:10 PM IST

UCG

भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित बीयू यानि बरकतउल्ला विश्वविद्यालय सहित प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों से संबद्ध ऑटोनॉमस कॉलेज दस फीसदी से ज्यादा कांट्रेक्ट फैकल्टी नहीं रख सकेंगे। इसके साथ ही अब प्रत्येक कॉलेज की लगातार मॉनीटरिंग होगी। मॉनीटरिंग का ये काम कॉलेज की इंटर क्वालिटी एश्योरेंस सेल (अाईक्यूएसी) द्वारा किया जाएगा।

दरअसल यूनिवर्सिटी ग्रांट कमिशन (यूजीसी) ने सरकारी और प्राइवेट कॉलेजों को दिए जाने वाले ऑटोनॉमस दर्जे के नियम सख्त कर दिए हैं। नए नियम के अनुसार हर ऑटोनॉमस कॉलेज को आईक्यूएसी की स्थापना करनी अनिवार्य होगी। यह सेल काॅलेज में देखेगी कि यूजीसी द्वारा तय गाइडलाइन का पालन हो रहा है या नहीं। इस मॉनीटरिंग में जो कॉलेज गुणवत्ता पर खरे नहीं उतरेंगे उनसे ऑटोनोमस का दर्जा वापस ले लिया जाएगा। इस नियम में बदलाव का ये कारण बताया जा रहा है ताकि काॅलेजों में पढ़ाई की गुणवत्ता बनी रहे।

अभी MP में 39 कॉलेजों को ऑटोनॉमस का दर्जा प्राप्त है। इस सेल के अंतर्गत ही शिक्षाविदों की एक टीम का गठन किया जाएगा, जो समय-समय पर काॅलेज के परफॉर्मेंस की रिपोर्ट यूजीसी को भेजेगी। रिपोर्ट को कॉलेज की वेबसाइट पर भी अपलोड करना अनिवार्य होगा।

साल में एक बार एक्सटर्नल की टीम कॉलेज की समीक्षा करेगी। इसमें यदि कहीं कोई कमी या शिकायत मिलती है तो यूजीसी को अधिकार होगा कि वो कॉलेज के खिलाफ जांच बैठा सके। जांच में यदि शिकायतें या गड़बड़ी होना सही पाया जाता है तो यूजीसी कॉलेज से ऑटोनॉमस का दर्जा वापस ले लेगी।

पोर्टल पर अभी अाधी- अधूरी जानकारी
ताजा स्थिति के तहत अभी शहर के ही ज्यादातर ऑटोनॉमस कॉलेज में इंटर क्वालिटी एश्योरेंस सेल स्थापित तो हैं लेकिन ये निष्क्रिय है। कॉलेजों ने पूर्व में तय गाइडलाइन के तहत कोर्स और फैकल्टी सहित अन्य जानकारियां पोर्टल पर सार्वजनिक भी की है लेकिन वो आधी-अधूरी है।

खासकर किसी भी कॉलेज के पोर्टल पर काेर्स की फीस दर्शायी नहीं जा रही। वहीं काॅलेजों में एनसीसी की गतिविधियां बढ़ाने के लिए भी अलग से प्रावधान किया गया है। यूजीसी ऑटोनॉमस कॉलेजों को एक लाख रुपए का अतिरिक्त अनुदान देगी जो एनसीसी को बतौर इलेक्टिव विषय क्रेडिट प्वाइंट के साथ शुरू करेंगे।

इधर,प्रदेश में पहली बार पक्षियों की गिनती, वन विहार में 28 जनवरी को होगी :
प्रदेश में पहली बार वन्य प्राणियों की तर्ज पर भोपाल सहित अन्य जिलों के स्थानीय और प्रवासी पक्षियों की गिनती की जाएगी। वन विहार नेशनल पार्क और भोज वेटलैंड में रहने वाले पक्षियों की गणना 28 जनवरी को की जाएगी। यह वन विहार नेशनल पार्क और भोपाल बर्ड संस्था मिलकर करेंगी।

वन विहार नेशनल पार्क और भोज वेटलैंड में हजारों स्थानीय और प्रवासी पक्षी आते हैं। यहां कौन सी प्रजाति के कितने पक्षी रहते हैं और इनमें से कितने प्रवासी पक्षी हैं, किन प्रवासी पक्षियों ने वन विहार में स्थाई रूप से डेरा डाल लिया है, अभी इसकी जानकारी और आंकड़े न तो वन विहार के पास है न ही अन्य संस्थाओं के पास। बर्ड वॉचिंग के दौरान ही बर्ड वॉचर एक दूसरे को जानकारी देते थे कि उन्होंने पहली बार नया पक्षी देखा।

ये है वजह...
वन विहार सहित भोपाल में स्थानीय और प्रवासी पक्षियों का कोई आंकड़ा किसी के पास उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए बर्ड काउंटिंग करने का निर्णय लिया गया। पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ मुख्यालय में एक बैठक हुई थी। इसमें इसका सुझाव दिया गया था, जिसे पीसीसीएफ जितेंद्र अग्रवाल ने स्वीकार कर लिया। इसकी शुरुआत बर्ड काउंटिंग डे पर होगी।