
MP election 2018: राजधानी भोपाल में कहां से कौन बना BJP का उम्मीदवार,जानिये यहां...
भोपाल। मध्यप्रदेश में होने वालों विधानसभा चुनावों से ठीक पहले भाजपा ने शुक्रवार को अपनी पहली सूची जारी कर दी है। इसमें जहां कई पूर्व विधायकों व मंत्रियों के नाम गायब हैं, वहीं कई पूराने नेताओं पर ही पुन: विश्वास किया गया है।
ऐसे में मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के पांच विधायकों पर पार्टी ने फिर से भरोसा करते हुए उन्हें इस बार भी टिकट दिया है। वहीं भोपाल के हाईप्रोफाइल गोविंदपुरा-उत्तर सीट पर अभी तक नाम नहीं आने से कश्मकश का दौर जारी है। कुल मिलाकर अब सबको दूसरी सूची का इंतजार है।
इन्हें मिला भोपाल की विधानसभा सीटों से टिकट...
1. संघ-संगठन में गहरी पैठ ने आसान की टिकट की राह
दक्षिण-पश्चिम : उमाशंकर गुप्ता
पहले दक्षिण विधानसभा क्षेत्र से विधायक थे। परिसीमन के बाद लगातार दो बार दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र से विधायक हैं। टिकट मिलने के बाद घर पर कार्यकर्ताओं से मुलाकात की।
क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं का है बुरा हाल
50 फीसदी आबादी झुग्गी-बस्तियों में रहती है। पानी-सड़क और नाले बड़ी समस्या बने हुए हैं। इसी तरह स्मार्ट सिटी में विकास के चलते टीटी नगर के बरसों शासकीय आवासों के साथ ही हरियाली का उजडऩा।
ये है खास...
आमदनी- बैंक का ब्याज, मकान किराया, वाहन किराया।
सोशल मीडिया- फेसबुक पर मप्र स्थापना दिवस की शुभकामना लालचंद गुप्ता ने टेग की है।
पहचान- आसानी से उपलब्धता। शिक्षा-स्वास्थ्य को लेकर सजगता।
राजनीतिक अनुभव- पार्षद और महापौर बने। कई विभागों के मंत्री।
कॅरियर का ग्राफ- रमेश शर्मा गुट्टू भैया को उत्तर से जितवाने में सहयोग किया। टिकट लेने का मौका था। महापौर बने तो कांग्रेस की सरकार से सहयोग नहीं मिला।
कोर टीम- रामदयाल प्रजापति, आसाराम शर्मा, राकेश जैन।
रेकॉर्ड- मंत्री रहते हुए कोई बड़ा आरोप नहीं लगा। कर्मचारी वर्ग की उपेक्षा के आरोप लगते रहे हैं।
लाइफ स्टाइल-कुर्ता-पायजमा पहनते हैं। पढऩे का शौक है।
ठीया- ई-22, 45 बंगला।
महिला सुरक्षा के उपाय किए जाना चाहिए। क्षेत्र में अतिक्रमण बढ़ रहा है। नेहरू नगर का हाट सड़क पर लगता है।
वीणा वानखेड़े, नेहरू नगर
पार्षद-विधायक और राज्य सरकार एक ही दल से हैं, फिर भी बस्तियों का विकास नहीं हुआ है। बुनियादी सुविधाएं तक नहीं दी गई हैं।
प्रवीण उपाध्याय, कोटरा
मैं दक्षिण से दो बार चुनाव लड़ चुका हूं, एक बार जीता भी। दक्षिण-पश्चिम से मौका मिलता है तो मेरी तैयारी पूरी है।
पीसी शर्मा, कांग्रेस
2- संगठन में पैठ, लेकिन जनता से रही दूरी
हुजूर: रामेश्वर शर्मा
भाजपा ने रामेश्वर शर्मा को दूसरी बार मौका दिया। वर्ष 2013 के चुनाव में बड़े अंतर से जीत हासिल की थी। टिकट मिलने के बाद बैरागढ़ में कार्यकर्ताओं संग मुलाकात का दौर।
ग्रामीण क्षेत्रों एवं कोलार की उपेक्षा
कोलार की उपेक्षा। शहर को जोडऩे वाला एक ही रास्ता। दामखेड़ा में निर्माणाधीन ब्रिज कोलार के लिए अनुपयोगी। कोलार और गांधी नगर के 12 से अधिक पार्षद नाराज हंै। गुटबाजी का भी आरोप।
ये है खास...
आमदनी- समाजसेवा, मानदेय, वेतन-भत्ते, कृषि आय।
सोशल मीडिया: सिंगारचोली ब्रिज चालू हुआ तो फेसबुक पोस्ट।
पहचान- धार्मिक आयोजनों जैसे कांवड़ यात्रा का आयोजन।
राजनीतिक अनुभव : बजरंग दल के बाद भाजयुमो में पद। पार्षद बने। भाजयुमो जिला अध्यक्ष रहे।
कॅरियर का ग्राफ- उत्तर में रमेश शर्मा के चुनाव में जमीनी मेहनत रंग लाई, पर बाद में खुद इस सीट से हार गए।
कोर टीम- अनूप जैन, दिलीप कृपलानी, प्रमोद सिंघल, विजय खंडेलवाल।
रेकॉर्ड- कार्यकर्ताओं, अफसरों, पार्षदों से विवाद। शहरी क्षेत्र में कम काम करवाने का आरोप।
लाइफ स्टाइल- कुर्ता पायजामा व पेंट-शर्ट में नजर आते हैं।
ठीया- 65 पत्रकार कॉलोनी।
कोलार में समस्याओं का अंबार है। यहां दावे-वादे बहुत किए, लेकिन काम नहीं हुए। खासतौर पर पेजयल और सड़क की समस्या बनी हुई है।
डॉ. सतेन्द्र राय, कोलार
कोलार में पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है। आवाजाही के लिए जो ब्रिज बनाया जा रहा है, वो किसी काम का नहीं है।
श्रुति त्रिपाठी, कोलार
हमारी पूरी तैयारी है। मौजूदा विधायक का पार्षद से लेकर जनता तक विरोध कर रही है। कांग्रेस अच्छा उम्मीदवार उतारेगी।
अवनीश भार्गव, कांग्रेस
3. विवाद में रहे, लेकिन टिकट लेने में रहे कामयाब
मध्य: सुरेन्द्रनाथ सिंह
जिला अध्यक्ष होने के बाद भी टिकट पाने में सफल। 2013 में पहली बार विधायक बने। टिकट मिलते ही बरखेड़ी में लोगों से मिले और सात नंबर मार्केट पहुंचे।
अतिक्रमण को संरक्षण देने वाले के रूप में छवि
एमपी नगर व हबीबगंज से गुमटियां नहीं हटने दीं। सुभाष नगर, विद्या नगर, रचना नगर में संकरी सड़कें, जर्जर नालियों की समस्या है। एमपी नगर में ड्रैनेज नहीं होने से बारिश में पानी भरता है।
ये है खास...
आमदनी- कृषि, कोलार के पास मत्स्य पालन केंद्र।
सोशल मीडिया- सरदार पटेल की जन्मतिथि पर ट्वीट किया।
पहचान- जनता से संपर्क, अतिक्रमण को संरक्षण देने वाले।
राजनीतिक अनुभव- पार्षद बने। भाजपा जिलाध्यक्ष बनने के बाद बीडीए अध्यक्ष का पद मिला। 2013 में विधायक बने।
कॅरियर का ग्राफ- वर्ष 2008 में टिकट नहीं, पर 2013 में मिला।
कोर टीम- सीआर दत्ता, विनय सेंगर, रामेश्वर सिंह व राजेंद्र गुप्ता।
रेकॉर्ड- न्यू मार्केट स्थित समता चौक पर रोज शाम मौजूद रहते हैं। 74 बंगले स्थित निवास पर भी मिलते हैं।
पहनावा- कुर्ता पायजामा नहीं पहनते। हमेशा ओपन शर्ट और पेंट पहनते हैं।
ठीया- समता चौक, न्यू मार्केट।
नए शहर का आधा भाग इस विधानसभा में कवर होता है। डवलपमेंट बाकी इलाकों से बेहतर है और विधायक तक पहुंचना आसान भी है।
विष्णु शर्मा, 7 नंबर स्टॉप
महिलाओं के लिए नया शहर सुरक्षित है। भाजपा ने काम करवाए हैं, वोटर मौजूदा विधायक से खुश हैं।
गोमा शर्मा, शिवाजी नगर
विधायक पांच साल सिर्फ अतिक्रमण बचाने में लगे रहे। विकास के नाम पर जनता को छला गया है।
आरिफ मसूद, कांग्रेस
4- क्षेत्र में दिखाई सक्रियता, पार्टी ने दिया तीसरा मौका
नरेला:विश्वास सारंग
भाजयुमो प्रदेशाध्यक्ष से विधायक और फिर राज्यमंत्री बने सारंग को तीसरा मौका मिला है। टिकट मिलने के बाद छोला स्थित हनुमान मंदिर दर्शन के लिए पहुंचे। कार्यकताओं से मिले।
कानून-व्यवस्था पर उठते रहे हैं सवाल
आरोप है कि सारंग के संरक्षण के चलते क्षेत्र में अतिक्रमण बड़ी समस्या है। खुले नाले जान ले रहे हैं। ज्यादातर कॉलोनियों में नर्मदा लाइन है, लेकिन पानी का प्रेशर कम है। सड़कों की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है।
ये है खास...
आमदनी- सारंग सिविल इंजीनियर हैं, कंसल्टेंसी का काम।
सोशल मीडिया- मप्र के स्थापना दिवस की शुभकामनाएं ट्वीट कीं।
पहचान- क्षेत्र में राखी बंधवाने के लिए चर्चित हैं। सुभाष नगर आरओबी का श्रेय लेते हैं।
राजनीतिक अनुभव- भाजयुमो जिलाध्यक्ष रहे बाद में प्रदेश महामंत्री बने। पार्षद भी रहे। 2008 में पहली बार विधायक बने 2013 में मंत्री पद मिला।
कॅरियर का ग्राफ- 2008 में विधानसभा टिकट को लेकर काफी खींचतान रही। पिता के हस्तक्षेप के बाद टिकट मिल पाया था।
कोर टीम- सूर्यकांत गुप्ता, अशोक वाणी, विमलेश ठाकुर, विजय सिंह।
रेकॉर्ड- पिछले चुनाव में 28 हजार वोटों से जीत दर्ज की।
ठीया- लिंक रोड नंबर एक निशात कॉलोनी के पास सरकारी आवास में दफ्तर बनाया है।
क्षेत्र में समस्याएं हैं, लेकिन निराकरण होता है। विधायक ने कालोनियों में सड़कें बनाई हैं। अभी भी कई काम बाकी हैं।
नितिन पाठक, पुष्पा नगर
महिलाओं में सुरक्षा की भावना जगाने के लिए विधायक कार्यक्रम करवाते रहते हैं। ऐसा नहीं लगा कि माहौल सही नहीं है।
मनजीत कौर, अशोका गार्डन
नरेला विधानसभा में अपराध का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। अपराधियों को राजनीतिक संरक्षण मिला है। क्षेत्र में कानून व्यवस्था खराब है। जनता बदलाव चाहती है।
सुनील सूद, कांग्रेस
5- बड़े नेताओं से नजदीकी होने का मिला फायदा
बैरसिया: विष्णु खत्री
वर्ष 2013 के चुनाव में जीते थे, युवा चेहरा। संगठन में पहुंच ने टिकट की राह आसान की।
टिकट मिलने के बाद बैरसिया में कार्यकर्ताओं से मुलाकात की और मंदिरों में आशीर्वाद लिया।
बिजली-सड़क की समस्याओं से घिरा क्षेत्र
प्रधानमंत्री आवास, सड़क और किसानों को बिजली आपूर्ति बड़े मुद्दे हैं। पीएम आवासों की गुणवत्ता पर सवाल हैं। दशहरे पर आरएसएस पथ संचलन में अधूरा गणवेश पहनकर पहुंचे तो संघ पदाधिकारी हुए थे नाराज।
ये है खास...
आमदनी-सलाहकार, मानदेय, वेतन-भत्ते, कृषि आय।
सोशल मीडिया- फेसबुक और ट्विटर पर सक्रिय नहीं।
पहचान-ग्रामीण क्षेत्रों से दूरी के आरोप। राजधानी में निवास करने के कारण लोग बैरसिया नहीं भोपाल के विधायक तक कहने लगे हैं।
राजनीतिक अनुभव- 1988 में छात्र राजनीति में सक्रिय रहे। 2004 में पार्षद का चुनाव जीता।
कॅरियर का ग्राफ- 2013 में पहली बार टिकट मिला और जीते।
कोर टीम- अनिल मित्तल, नितिन माहेश्वरी, कुबेर सिंह गुर्जर और हरिनारायण मालवीय।
रेकॉर्ड- जमीनी पकड़ नहीं।
लाइफ स्टाइल- जोधपुरी सूट और कुर्ता-पायजामा।
ठीया- 149 ओमशिव नगर, लालघाटी, भोपाल।
बैरसिया के विकास के लिए काम नहीं किया। भोपाल के पास होने के बावजूद पानी और बिजली की समस्या है।
माधो सिंह, बैरसिया
रोजगार के लिए कुछ नहीं किया। विधायक यहां रहते ही नहीं हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में दौरे तक नहीं करते हैं।
ममता ठाकुर, बैरसिया
कांग्रेस पूरे दमखम से चुनाव में उतर रही है। हमारा प्रयास है कि ये सीट जीतें। विधायक ने यहां विकास कार्य नहीं करवाए हैं।
राम मेहर, कांग्रेस
Published on:
03 Nov 2018 09:07 am

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