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दिखी स्वच्छा भारत की झलक पर्यावरण बचाने सदाओं के बीच पर्यावरण बचाने का संदेश

मोहर्रम पर शहर में निकाला मातमी जुलूस सदाओं से गूंजा माहौल
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भोपाल

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Bhalendra Malhotra

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Updated: 22 Sep 2018, 4:03 AM IST

Muharram

Muharram of Muslim society

भोपाल. लोभान की खुशबू और नारा-ए-तकबीर की सदा। वहीं दूसरी तरफ पूरी अकीदत के साथ हजरत इमाम हुसैन की शहादत को याद करता हुआ मातमी जुलूस। ये नजारा मोहर्रम की दसवीं तारीख यौमे आशूरा के मौके पर शुक्रवार को शहर के कई हिस्सों में नजर आया। हर तरफ से या हुसैन की सदाएं सुनाई दे रही थीं। इस दौरान गंगा जमुनी तहजीब की मिसाल भी देखने को मिली। इस बार जुलूस में सरकार के स्वच्छता अभियान का असर भी नजर आया। ताजियों और अखाड़ों के साथ-साथ वॉलेन्टियर भी चल रहे थे। इन वालेंटियर का जुलूस के पीछे चलकर साफ सफाई की व्यवस्था को दुरुस्त रखना था। यह वॉलेंटियर रास्ते भर डिस्पोजल, पानी के पाउच और अन्य सामान बीनते रहे।

जुलूस और अखाड़ों के साथ शहर के अलग-अलग हिस्सों से ताजिए निकाले गए। अलम, अखाड़ों के साथ ये शहर के अलग-अलग मार्गों से होते हुए देर रात बुधवारा में जमा हुए। गिन्नौरी स्थित हुसैनी ताजिया घाट और शिरीन नदी के घाट पर इनका विसर्जन किया जाएगा। कोहेफिजा में एक पोखर में भी ताजिए विसर्जन के लिए पहुंचे। भेल और इंद्रपुरी से भी ताजिए निकाले गए है।

गौरतलब है कि शहर में 650 हजार ताजिए और 150 सवारियां उठती हैं। मुस्लिम त्योहार समिति के अध्यक्ष डॉ. औसाफ शाहमीरी खुर्रम बताते है कि ताजियों का चलन शहर में 350 साल पुराना है। हर धर्म और समाज के लोग इसमें शामिल रहते हैं।

शहादत की याद में किया रक्तदान

मोहर्रम के मौके पर शुक्रवार को करबला रोड पर रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। इसमें सभी धर्मों के लोगों ने हिस्सा लिया। दोपहर दो से पांच के बीच हुए इस शिविर में करीब 55 यूनिट रक्त जमा हुआ। इसे अस्पताल में जमा कराया गया है। सैय्यद आबिद हुसैन ने बताया कि अंजुमन गुलामाने मोहम्मद तंजीम के जरिए ये आयोजन हुआ। मोहसिन नकवी ने बताया कि इसका मकसद जरूरतमंदों की मदद करना है। पिछले कई सालों से मोहर्रम पर शिविर का आयोजन किया जाता है।

नजर आई साम्प्रदायिक सौहार्द की मिसाल

मुस्लिमों के साथ कई हिंदू परिवारों में ताजियों की पुश्तैनी परंपरा चली आ रही है। इनमें पुराने शहर के लक्ष्मी नारायाण सोनी, बाबू लाल प्रजापति, श्याम लाल मीणा, खंजाची गली में मंजू बाई का ताजिया, धोबीघाट पर चंदा बाई का ताजिया,चौक में मन्नू अग्रवाल आदि का ताजिया तो नामी ताजियों में शामिल है। इसके साथ ही किन्नरों भी ताजिया बनाते हैं। ये भी आकर्षण का केन्द्र है।