
क्या आप भी परेशान हैं इस तरह के दर्द से, तो ये है उपाय
भोपाल। हमारे शरीर के महत्वपूर्ण अंगों में नसें भी शामिल हैं, जो रक्त संचारित करती रहती है। जो हमें जिन्दा रहने के लिए सबसे अहम होता है।
लेकिन कई बार कुछ कारणों के चलते हमारी नसें कमजोर पड़ जाती हैं जिसकी वजह से हमें कई तरह की शरीरिक परेशनियों का सामना करना पड़ता है। इन्हीं नसों के दर्द को नर्व पेन कहा जाता है।
जानकारों के अनुसार नर्व पेन या न्यूरॉल्जिया किसी खास नस या नर्व में होता है। वहीं न्यूरॉल्जिया में जलन, संवेदनहीनता या एक से अधिक नर्व में दर्द फैलने की समस्या हो सकती है।
न्यूरॉल्जिया से कोई भी नर्व प्रभावित हो सकती है। नसों में दर्द के संबंध में डॉ. इंदू व आयुर्वेद के डॉ. राजकुमार कहते हैं कि इस दर्द के कई कारण हो सकते हैं, जबकि अधिकतर कारणों का तो समय पर पता ही नहीं चलता।
ये हैं कारण...
ड्रग्स, रसायनों के कारण परेशानी, क्रॉनिक रिनल इनसफिशिएंशी, मधुमेह, संक्रमण जैसे-शिंगल्स, सिफलिस और लाइम डिजीज, पॉरफाइरिया, नजदीकी अंगों (ट्यूमर या रक्त नलिकाएं) से नर्व पर दबाव पड़ना, नर्व में सूजन या तकलीफ, नर्व के लिए खतरे या गंभीर समस्याएं(इसमें शल्यक्रिया शामिल है) के अलावा कई बार तो अधिकतर मामलों में कारण का पता नहीं चलता।
डॉ. इंदू कहती है कि नर्व पेन एक जटिल और क्रॉनिक तकलीफदेह स्थिति है, जिसमें वास्तविक समस्या समाप्त हो जाने के बाद भी दर्द स्थायी रूप से बना रहता है।
नर्व पेन में दर्द शुरू होने और रोग की पहचान होने में कुछ दिन से लेकर कुछ महीने लग सकते हैं। नर्व को थोड़ा सा भी नुकसान पहुंचने पर या पुराने चोट ठीक हो जाने पर भी दर्द शुरू हो सकता है।
ये हैं नसों के कमजोर होने के लक्षण...
वहीं डॉ. राजकुमार के अनुसार यदि आपके शरीर की नसें कमज़ोर हो गई हैं, तो इससे शरीर में होने वाले इफ़ेक्ट की पहचान करना जरूरी होता है जिससे सही इलाज करने में सहायता मिलती है।
- यदि आपकी याददास्त घटने लगे तो समझ लीजिये की आपकी नसें कमजोर पड़ने लगी हैं।
- चक्कर आना भी एक संकेत है कि आपकी नसें कमज़ोर है क्योंकि रक्त संचारित नही हो पा रहा।
- रक्त जब शरीर में सही ढंग से नही सर्क्युलेट होता तो आंखों के आगे उठने-बैठने के समय अंधेरा छाने लगता है।
- अपच होना भी एक संकेत है।
- अनिन्द्रा भी दर्शाता है आपके नसों की कमज़ोरी।
- हदय-स्पंदन
- शरीर में खून की कमी होना।
वहीं इसके अलावा जलन की अनुभूति, संवेदनहीनता और पूरे नर्व में दर्द, शरीर के प्रभावित भाग की गति औऱ कार्य-प्रणाली, मांसपेशियों की कमजोरी, दर्द या नर्व की क्षति के कारण अवरुद्ध हो जाती है।
ऐसे में दर्द अचानक उठता है और बहुत तेज दर्द होता है, जैसे-कोई नुकीली चीज चुभ रही हो या जलन की अनुभूति होती है। यह दर्द लगातार रह सकता है या रुक-रुक कर होता है।
छूने या दबाने से दर्द महसूस होता है और चलना फिरना भी कष्टदायक हो जाता है। इस दौरान प्रभावित नर्व के पथ में दर्द रहता है या यह दर्द बार-बार होता है।
जांच और रोग निदान
किसी एक जांच से नर्व पेन की पहचान नहीं की जा सकती। प्रारंभ में डॉक्टर आपके लक्षणों और दर्द के विवरण के साथ शारीरिक जांच से रोग के पहचान का प्रयास करता है। जिसका आपके शारीरिक जांच से पता चल सकता है।
इसमें ... : त्वचा में असामान्य अनुभूति।
: गहरी टेंडन रिफ्लैक्स में कमी या मांसपेशियों का कम होना।
: प्रभावित क्षेत्र में पसीना कम निकलना(पसीना निकलना नर्व के द्वारा नियंत्रित होता है)।
: नर्व के पास स्पर्श से दर्द या सूजन महसूस होना।
: ट्रिगर प्वाइंट या ऐसे क्षेत्र जहां हल्के से छू देने से भी दर्द शुरू हो जाए।
: दांतों की जांच, जिसमें फेशियल पेन को जन्म देने वाली दांतों की समस्याएं शामिल नहीं हैं(जैसे-दांतों में ऐबसेस या फोड़े)।
: प्रभावित क्षेत्र के लाल हो जाने या सूजन आने जैसे-लक्षण, जिससे संक्रमण, ह़ड्डी टूटने या रयूमेटॉइड अर्थाराइटिस की स्थिति की पहचान में सहायता मिले।
नसों में दर्द का उपचार
जानकारों के मुताबिक नर्व पेन का इलाज सामान्यतया कठिन है, और प्राय: दर्द से राहत देने वाले इलाजों से इस दर्द में कोई अंतर नहीं आता।
ऐसे में आपको कई प्रकार के चिकित्सा पद्धतियों को आजमाने की आवश्यकता होती है, ताकि पता चल सके कि कौन सी प्रणाली आपके लिए लाभकारी है। कभी-कभी स्वयं या समय के साथ हालत में खुद-ब-खुद सुधार आ जाता है।
उपचार के तरीके:
: अगर किसी आंतरिक बीमारी(जैसे-डायबिटीज, ट्यूमर) के कारण दर्द हो रहा है तो इसका पता चलने पर अगर इस बीमारी का इलाज संभव है तो इलाज करना।
: दर्द की तीव्रता कम करना।
: डायबिटीज के रोगियों में शुगर पर कड़े नियंत्रण से न्यूरॉल्जिया में लाभ होता है।
: कभी-कभी ट्यूमर या किसी अन्य वजह से नर्व पर दबाव पड़ने की वजह से उसमें दर्द होता है, ऐसी स्थिति में जिस कारण से दबाव पड़ रहा है उसे सर्जरी से हटाने की जरूरत होती है।
: दैनिक जीवन पर दर्द के प्रभाव कम करना।
इन बातों का रखें खास ध्यान...
- यदि आपके शरीर के किसी भी अंग की नसें कमज़ोर हो गई हों तो उसका घर बैठ इलाज करने से पहले इन कुछ बातों का विशेष ध्यान रखें।
- दबी हुई नस को जितना हो सके दबाना या मोड़ना टालें।
- यदि सूजन हो तो सूजन कम करने के लिए बर्फ और गर्म चीज़ों से बारी-बारी से मसाज करें।
- ज्यादा से ज्यादा आराम करें।
- आराम पाने के लिए ज्यादा दबाव न डालें हल्की मालिश ही करें।
जितना हो सके सफेद या ब्राउन पट्टी की मदद से नस को एक जगह पर स्थिर रखें।
- हद से ज्यादा दर्द हो तो ही कोई दर्द निवारक दवा लें अथवा किसी भी तरह की दवा लेने से बचें।
ये है नसों की कमज़ोरी का इलाज...
इनमें से कोई भी लक्षण जब शरीर में घटित होता है तो नसों में बहुत तेजी के साथ दर्द होने लगता है, जो परेशानी का सबब बन जाता है।
नसों के दर्द को दूर करने के कुछ आसान घरेलू इलाज...
1. पुदीने का तेल
यदि आपके नसों में बहुत दर्द होता है, तो दर्द से प्रभावित क्षेत्र में पुदीने के तेल से मालिश करें। इससे आपको नसों के दर्द से राहत मिलेगी।
2. सरसो का तेल
सरसों के तेल से नसों के दर्द से छुटकरा पाया जा सकता है। सरसों के तेल को गरम करके इससे मालिश करे। ऐसा करने से आपको निश्चित ही लाभ होगा।
3. लेवेंडर का फूल
लेवेंडर का फूल तथा सुइया को नहाने के पानी में मिला कर नहाएं ।
4. बेर की गुठलियां
नसों की कंजोरी को दूर करने के लिए आप बेर की गुठलियों को गुड़ के साथ खाएं जिससे की नसों में मज़बूती आएगी और शरीर बलवान बन जाता है।
5. गाय का दूध
नसों की कमजोरी को दूर करने के लिए आप गाय के दूध के साथ मक्खन, मिश्री भी खा सकते है, जिससे काफी हद तक नसों की कमजोरी में आराम मिलता है।
6. किसमिस
किसमिस खाने की आदत डाल लें। यह शरीर में अन्य लाभ पहुंचाने के साथ ही नसों की कमजोरी का भी बेहतरीन इलाज है। पर हाँ इसका इस्तेमाल आप सर्दियों के मौसम में ही करने की कोशिश करें।
7. आयुर्वेद का साथ
अश्वगन्धा 100 ग्राम, सतावर 100 ग्राम, बाहीपत्र 100 ग्राम, इसबगोल की भूसी 100 ग्राम, तालमिश्री 400 ग्राम इस सबका एक मिश्रण बना ले और उस मिश्रण को सुबह व शाम को दूध के साथ लें।
लगभग एक महीने के प्रयोग से ही शरीर की रक्त क्षमता बढ़ जाती है। और नशों में ताक़त आजाती है ।
8. व्यायाम
यदि आपकी नसों में बहुत दर्द होता है तो आपको नियमित व्यायाम करना चाहिए जिससे नसों को बहुत लाभ होता है और इसमें पड़ी हुई गांठ भी धीरे-धीरे ठीक हो जाती है।
9. भ्रस्तिका प्राणायाम
भ्रस्तिका प्राणायाम करने से भी नसों के रोगी को बहुत लाभ होता है। लाभ होता है इसलिए रोजाना यह प्राणायाम करें
10. अनुलोम विलोम
अनुलोम विलोम प्राणायाम करने से भी नसों में होने वाली दिक्कत को एक दम से दूर किया जा सकता है और बहुत दिनों तक करेंगे तो ये बीमारी जड़ से ख़त्म हो जाएगी।
11. मसाज का सहारा
नस में होने वाले दर्द पर दबाव डालने से तनाव को मुक्त करने और दर्द कम करने में मदद मिल सकती है। पूरे शरीर की मालिश करने से सभी मांसपेशियों की शिथिलता को बढाने में और साथ ही प्रभावित हिस्से को आराम देने में हेल्प मिलती हैं।
Published on:
10 Jun 2019 06:25 pm
बड़ी खबरें
View Allभोपाल
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
