अब मध्यप्रदेश में होंगे 55 जिले

- कैबिनेट बैठक : नागदा, मैहर और चाचौड़ा को सैद्धांतिक सहमति

By: anil chaudhary

Published: 19 Mar 2020, 05:05 AM IST

भोपाल. सियासी घमासान के बीच कमलनाथ सरकार ने बुधवार को मैहर, नागदा और चाचौड़ा को जिला बनाने की मंजूरी दे दी। इसके बाद अब जिला गठन करने की अधिसूचना निकलेगी, जिस पर दावे-आपत्ति के बाद निर्धारण होगा। वहीं, कोरोना वायरस के असर के कारण घटते राजस्व का हवाला देकर घर बैठे ऑनलाइन तरीके से रजिस्ट्री करने पर स्टॉम्प पर एक फीसदी की छूट देने का प्रस्ताव फिलहाल रोक दिया गया। यह प्रस्ताव अब अगले वित्तीय वर्ष में ही लाया जाएगा।
मुख्यमंत्री कमलनाथ की अध्यक्षता में बुधवार को कैबिनेट बैठक में तीन नए जिले बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह के छोटे भाई लक्ष्मण सिंह की नाराजगी दूर करने के लिए चाचौड़ा को जिला बनाया जा रहा है, जबकि भाजपा विधायक नारायण त्रिपाठी की मांग पूरी करने मैहर को जिला बनाना तय किया है। इसके अलावा नागदा को कांग्रेस विधायक दिलीप सिंह गुर्जर की मांग के कारण जिला बनाना तय किया है। राजनीतिक समीकरण साधने के लिए तीनों जिले गठित करना तय किया है।
- ये रहेगी गठन की प्रक्रिया
अभी तीनों जिलों के कलेक्टर ने प्रस्ताव भेजा है, लेकिन उसमें तहसीलों का बंटवारा तय नहीं किया गया है, इसलिए पहले तहसीलों को जोड़कर नए जिलों की सीमा का प्रस्ताव तैयार होगा। फिर इस प्रारूप के साथ तीनों जिले के गठन के लिए अधिसूचना जारी होगी। इस पर 30 दिन में दावे-आपत्ति बुलाए जाएंगे। दावे-आपत्ति का निराकरण करने के बाद नए जिले गठित होने की अधिसूचना जारी होगी। राजनीतिक कारणों से यह गठन हो रहा है, इस कारण यदि सरकार बदल जाती है, तो नई सरकार आकर इस प्रस्ताव को निरस्त भी कर सकती है।

- कोरोना के कारण रोका छूट का प्रस्ताव
कोरोना वायरस के कारण राजस्व घटने के कारण फिलहाल घर बैठकर ऑनलाइन रजिस्ट्री करने पर स्टॉम्प पर एक फीसदी छूट देने का प्रस्ताव रोक दिया गया है। पिछले साल के मुकाबले इस साल मार्च के महीने में 35 फीसदी राजस्व की गिरावट दर्ज की गई है। इसलिए अभी स्टॉम्प पर और छूट दे दी गई, तो राजस्व और कम हो सकता है। इस कारण अपर मुख्य सचिव आइसीपी केसरी ने इस प्रस्ताव को अभी रोकने की बात कही थी, जिस पर विभागीय सहित सीएम भी सहमत हो गए। इसलिए प्रस्ताव को अब अगले वित्तीय सत्र में लाना तय किया गया है।
- मंत्री बोले- जिनमें खर्च नहीं वो सारे वचन पूरे कर दोमंत्री पीसी शर्मा ने संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण की बात कही, जिस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके लिए कैबिनेट की सब कमेटी बनी है। उसकी रिपोर्ट के आधार पर निर्णय करेंगे। इस पर शर्मा ने कहा कि जिन वचनों को पूरा करने में कोई आर्थिक बोझ नहीं है, उन्हें पूरा कर देना चाहिए, तो मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे वचनों को भी बाद में तय प्रक्रिया के तहत देखेंगे।
- सियासी चर्चा, चिंता और नाराजगी
औपचारिक कैबिनेट में मंत्रियों ने मौजूदा सियासी घटनाक्रम पर चर्चा की। इसमें कर्नाटक में बुधवार को ही पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह के साथ हुए घटनाक्रम का जिक्र भी हुआ। कमलनाथ ने बैठक में बताया कि उन्होंने भी कर्नाटक के सीएम से बात करने की कोशिश की थी, लेकिन बात नहीं हो सकी। इस पर कानूनी रास्तों को लेकर भी जिक्र हुआ। सूत्र बताते हैं कि राज्यपाल की चि_ी पर भी चर्चा हुई।
- जीएसटी छूट व अदालतों में कैमरे को मंजूरी
बैठक में शहरी क्षेत्रों में पेयजल योजना में जीएसटी लागू होने के पूर्व हो चुके निर्माण कामों में जीएसटी की छूट देने का प्रस्ताव भी मंजूर कर दिया गया। साथ ही न्यायालयों में सीसीटीवी कैमरे लगाने भी हरी झंडी दे दी। इसके तहत पहले जबलपुर में पॉयलेट प्रोजेक्ट के तहत सभी न्यायालयों में कैमरे लगेंगे। इसके बाद दूसरे जिलों में प्रोजेक्ट लागू किया जाएगा। इसके लिए पहले साल 40 करोड़, दूसरे साल 50 करोड़ और तीसरे साल 35 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।
- ये भी अहम निर्णय
स्टेट सिविल सप्लाई कार्पोरेशन को कर्ज की 26000 करोड़ की गारंटी। केंद्र सरकार से मप्र को पैसा नहीं मिला है, जिसके चलते इस कर्ज की गारंटी की जरूरत पड़ी।
सरदार सरोवर परियोजना प्राधिकरण में शम्भू सिंह, सैय्यद अली नकवी व आइएस श्रीवास्तव, एसएल जैन व एसएस द्विवेदी की संविदा नियुक्ति मार्च 2021 तक बढ़ाई।
नर्मदा परियोजनाओं के शिकायत निवारण प्राधिकरण में पूर्व आईएएस विनोत सेमवाल व अरुण कोचर और पूर्व न्यायाधीश अब्दुल जब्बार खान की संविदा अवधि मार्च 2021 या प्रकरण निराकरण होने तक बढ़ाई। पूर्व आईएएस चतुर्भुज की सेवावृद्धि भी दिसंबर 2020 या प्रकरण निराकरण तक बढ़ाई।

Kamal Nath
anil chaudhary Desk
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