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दूसरे राज्य अथॉरिटी बनाकर बचा रहे तालाब, मप्र में खत्म कर दी एलसीए

केरल, तमिलनाडु ने बनाए एक्ट: हरियाणा में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में काम कर रही पॉण्ड मैनेजमेंट अथॉरिटी
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भोपाल

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Bharat pandey

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Updated: 24 Sep 2018, 4:02 AM IST

Pond management authority

Pond management authority

भोपाल। देशभर में जलस्रोतों को बचाने के लिए जागरुकता आ रही है। केरल और कर्नाटक झीलों, तालाबों को बचाने के लिए विशेष एक्ट बना चुके हैं वहीं हाल ही में हरियाणा कैबिनेट ने न केवल एक्ट पास किया बल्कि इसकी पालना के लिए पॉण्ड कंजरवेशन अथॉरिटी भी बनाई है। इसके उलट प्रदेश में जलाशयों को लावारिस छोड़ दिया गया है। झीलों की सुरक्षा के लिए बने लेक कंजरवेशन अथॉरिटी को एप्को में मर्ज कर दिया गया, फिर उसे बंद कर दिया गया जिसके चलते इन तालाबों की सुध लेने के साथ सुधार की जिम्मेदारी कोई एक एजेंसी लेने को तैयार नहीं है।

ऐसे हो रहा हरियाणा में संरक्षण
हरियाणा पॉण्ड कंजरवेशन अथॉरिटी के एक्जीक्यूटिव वाइस चेयरमेन बनाए गए प्रदेश के पर्यावरणविद् सुभाष सी पांडेय के नेतृत्व में अथॉरिटी ने काम शुरू कर दिया है। पदभार ग्रहण करने के बाद पहली बार भोपाल प्रवास पर आए पांडेय ने पत्रिका से चर्चा में विधेयक और अथॉरिटी के कामों के बारे में बताया। हरियाणा कैबिनेट की ओर से पास किए गए विधेयक के अनुसार तालाबों पर अतिक्रमण करने वाले किसी भी व्यक्ति पर 25 हजार तक का जुर्माना और तीन महीने की जेल की जा सकती है। हरियाणा में 15 हजार 540 तालाब है। पहले चरण में इनके सीमांकन चिन्हांकन के लिए अभियान शुरू किया गया है। तालाबों के संरक्षण के लिए बनी अथॉरिटी में सीधे मुख्यमंत्री को अध्यक्ष बनाया गया है, वहीं जलसंसाधन विभाग के इंजीनियर इन चीफ सहित अन्य विभागों के प्रमुखों को शामिल किया गया है।
हरियाणा के एनसीआर में आने वाले क्षेत्र में स्थित 49 तालाबों के संरक्षण की कार्ययोजना तैयार हो चुकी है।

दावा सिर्फ निरीक्षण का, दूसरे के पास स्टाफ नहीं
एलसीए की ओर से प्रतिमाह भोपाल के 10 सहित प्रदेश भर के सैकड़ों तालाबों की वस्तुस्थिति की रिपोर्ट लेकर साइट पर सार्वजनिक की जाती थी, इतना ही नहीं तालाबों के संरक्षण के लिए कदम उठाए जाते थे। लेकिन तीन साल पहले एलसीए को एप्को में मर्ज किया गया बाद में एप्को ने इससे जुड़े सभी कामों को ठंडे बस्ते में डाल दिया। एप्को के अधिकारियों का कहना है कि उनके पास इस कार्य के लिए पर्याप्त स्टॉफ नहीं है।

एलसीए को मर्ज करने का निर्णय क्यों हुआ और इसका क्या असर है इस बारे में आपको उच्चाधिकारियों से बात करनी चाहिए। -विनीता विपट, सीनियर सांइटिस्ट एप्को, एलसीए की तत्कालीन प्रमुख