28 अक्टूबर 2026,

बुधवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

शाम 6 से रात 9 बजे तक संभलकर चलें, सड़क पर हो गई 2872 लोगों की मौत

ट्रेनिंग एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट के शोध के मुताबिक इस बीच प्राकृतिक रोशनी कम होने और सड़कों पर ट्रैफिक अधिक होने से ऐसी स्थिति बनती है। अंधेरा होने से पहले मुकाम तक पहुंचने की जल्दी भी हादसे की वजह बनती है।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

भोपाल

•

image

Subodh Kumar Tripathi

•

Updated: 22 May 2022, 3:27 PM IST

शाम 6 से रात 9 बजे तक संभलकर चलें, सड़क पर हो गई 2872 लोगों की मौत

शाम 6 से रात 9 बजे तक संभलकर चलें, सड़क पर हो गई 2872 लोगों की मौत

भोपाल. प्रदेश की सड़कों पर शाम छह से नौ बजे तक संभलकर वाहन चलाएं...क्योंकि इस बीच सबसे अधिक सड़क हादसे होते हैं। पुलिस ट्रेनिंग एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट के शोध के मुताबिक इस बीच प्राकृतिक रोशनी कम होने और सड़कों पर ट्रैफिक अधिक होने से ऐसी स्थिति बनती है। अंधेरा होने से पहले मुकाम तक पहुंचने की जल्दी भी हादसे की वजह बनती है। बहरहाल, जनवरी 2021 से दिसंबर 2021 तक मध्यप्रदेश में इन तीन घंटों में सबसे अधिक 10332 हादसों में 2872 लोगों की मौत हुई है। इनमें शहरी क्षेत्र में 755 लोगों की तो ग्रामीण में 2117 लोगों की जान गई। यहां बता दें कि वर्ष 2021 में मप्र में हुए कुल 48877 सड़क हादसों में 12057 की मौत हुई, जबकि 48956 लोग घायल हुए थे।

मौसम साफ तो हादसे भी अधिक
पुलिस ट्रेनिंग एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट ने प्रदेश में वर्ष 2021 में हुए सड़क हादसों का विस्तृत विश्लेषण किया तो पता चला कि जब मौसम साफ रहता है। तब सबसे अधिक 31023 सड़क हादसे हुए। इनमें 7358 लोगों की मौत हुई। बारिश में सड़क हादसों में मौतों का आंकड़ा 1495 था। धुंध और कोहरे के दौरान हुए 4034 सड़क हादसों में 1233 लोगों की जान गई।

शहर और गांवों की अंदरूनी सड़कों पर सबसे अधिक मौत
वर्ष 2021 में सबसे अधिक मौतें शहरों और गांवों की आंतरिक सड़कों पर हुई हैं। यहां हुए 26372 हादसों में 5646 लोगों की मौत हुई। नेशनल हाइवे पर हुए 11030 हादसों में 3389 लोगों ने तो स्टेट हाइवे पर 11475 हादसों में 3022 लोगों ने जान गंवाई। मैनिक के पूर्व छात्र और रिसर्चर आशुतोष सिंह ठाकुर के अनुसार ओवर स्पीड, ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन और नशाखोरी के कारण सड़क हादसे बढ़ रहे हैं।

यह भी पढ़ें : 10 साल के बच्चे को 15 बार चाकू से गोदा, पट्टियों से बंध गया पूरा शरीर

पीक ऑवर या कहें कि शाम छह से नौ बजे के बीच ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सड़क हादसे अधिक होते हैं। ट्रैफिक नियमों के पालन के लिए जागरुकता कार्यक्रम लगातार जारी रहते हैं। इसके अलावा पीक ऑवर में ट्रैफिक पुलिसकर्मियों के अलावा जिला पुलिस बल के जवानों की भी तैनाती की जाती है, ताकि नियमों का पालन करवाया जाए और हादसों को टाला जा सके।
-जी. जर्नादन, एडीजी, पुलिस ट्रेनिंग एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट भोपाल