
atal ji at jagarnath tample
(पत्रिका ब्यूरो,भुवनेश्वर): भारतीय राजनीति के पितामह कहे जाने वाले भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटलबिहारी वाजपेयी का ओडिशा से गहरा नाता रहा है। राज्य में दिन भर जगह-जगह श्रृद्धालि सभाएं होती रहीं। भाजपा कार्यालयों में कार्यकर्ताओं ने श्रृद्धांजलि दी। चैनलों पर अंत्येष्टि कार्यक्रम लोग देखते रहे। स्कूल कालेजों में शोक के कारण छुट्टी कर दी गई थी।
अटल जी का पुरी से बहुत गहरा नाता था। वह ओडिशा आने पर पुरी के जगन्नाथ धाम जरूर जाते थे। महाप्रभु जगन्नाथ के दर्शन बाद में कोर्णाक के सूर्य मंदिर भी गए थे। चंद्रभाग के तट पर मेडिटेशन की भी यादें लोगों के मस्तिष्क में अभी भी ताजा हैं। यही नहीं सौ साल पूरे कर रहा लोक सेवक मंडल द्वारा संचालित ओ़डिया अखबार "समाज" के लोगों से भी नाता रहा है। वह ओडिशा आगमन पर कटक स्थित "समाज" के मुख्यालय भी गए।
लोगों को याद है कि 17 अप्रैल 1998 जब अटल जी नंगे पांव गजपति महाराज के निवास से श्रीमंदिर तक गए और प्रोटोकॉल तोड़कर पुरीवासियों से मिले। इससे पहले वह 1994 में भी आए थे। महाप्रभु के प्रति वाजपेयी की अटूट आस्था का लोग जिक्र करते नहीं थकते। पुरी धाम में आने पर वह यह तक भूल जाते थे कि उनका प्रोटोकॉल है।
जिला प्रशासन उनके आगमन पर सुरक्षा अपने हिसाब से करता था। अलमस्त तबीयत के व्यक्ति अटल जी महाप्रभु के द्वार आते ही सामान्य मनुष्य बन जाते थे। भाजपा नेता कृष्ण चंद्र जगदेव उनके संस्मरण सुनाते नहीं थकते। उन्होंने बताया कि कैसे अटल जी कोर्णाक मंदिर गए। चंद्रभाग तट पर ध्यान किया।
बता दें कि अटल जी का पार्थिव शरीर शुक्रवार सुबह से 2 बजे तक दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय पर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया। यहां से उनकी शव यात्रा निकाली गई जिसमे लोगों का जनसैलाब उमड़ पडा।
Updated on:
17 Aug 2018, 3:43 PM IST
Published on:
17 Aug 2018, 3:37 PM IST
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