
जगदलपुर. छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर में तर्रेम मुठभेड़ (Bijapur Naxal Encounter) के बाद से सीआरपीएफ के कोबरा बटालियन के अपहृत जवान राकेश्वर सिंह मन्हास (Abducted CRPF jawan released by Naxals) को गुरुवार शाम 4 बजे जन अदालत में नक्सलियों ने रिहा कर दिया। नक्सलियों ने जन अदालत में 25 गांव के लोगों की मौजूदगी में जवान की रस्सियां खोली। जवान को रिहा करवाने के लिए बुधवार को ही मध्यस्थ तर्रेम पहुंच गए थे।
उन्होंने रात तर्रेम थाने में ही बिताई। इसके बाद वे सुबह बाइक पर सवार होकर जंगलों की ओर रवाना हुए। घटनास्थल जोनागुड़ा से लगभग 25 किमी आगे मिरीगुड़ा के जंगलों में नक्सलियों ने जन अदालत लगाई और जवान को रिहा किया। रिहाई के बाद जवान को बासागुड़ा थाना लाया गया। यहां जवान की मेडिकल जांच की गई। जवान पूरी तरह से स्वस्थ है।
इन्होंने निभाई मध्यस्थ की भूमिका
जवान को छुड़वाने में सरकार की तरफ से मध्यस्थ के रूप में समाजसेवी पद्मश्री धर्मपाल सैनी और बीजापुर गोंडवाना समन्वय समिति अध्यक्ष तेलम बरैया, गोंडवाना समाज की उपाध्यक्ष सुकमती अक्का, रिटायर्ड शिक्षक रूद्र करे ने प्रमुख भूमिका निभाई। मुठभेड़ के बाद लापता जवान को लेकर फोर्स अफसरों एवं जवान के परिवारजनों में संशय की स्थिति थी।
जवान की बेटी ने पीएम से की थी मार्मिक अपील
जम्मू कश्मीर निवासी कोबरा 210 बटालियन के जवान राकेश्वर सिंह की बेटी ने प्रधानमंत्री से अपने पिता की सकुशल रिहाई की मार्मिक अपील की थी। गुरुवार को जैसे ही नक्सलियों से रिहाई का समाचार जवान के जम्मू स्थित परिवार तक पहुंचा तो पूरा खुशी से झूम उठा। जवान की पत्नी ने केंद्र एवं राज्य सरकार के साथ पति की रिहाई में साथ देने वाले पत्रकारों एवं अन्य लोगों के प्रति आभार जताया है।
Published on:
08 Apr 2021 08:55 pm
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