
बेटे के लिए पिता का तेंदुए के साथ हुआ संघर्ष! फोटो सोर्स-Ai
Leopard Attack:उत्तर प्रदेश के बिजनौर में एक बुजुर्ग पिता ने अपनी जान की परवाह किए बिना तेंदुए से भिड़कर बेटे की जान बचा ली। घटना नजीबाबाद के मंडावली थाना क्षेत्र के मोथला उर्फ नीम वाली वन क्षेत्र की है। यहां पशु चराने गए 33 साल के वन गुर्जर रफी पर अचानक तेंदुए ने हमला कर दिया। बेटे की चीख सुनकर करीब 250 मीटर दूर मौजूद उसके 65 वर्षीय पिता गुलाम नबी डंडा लेकर मौके पर पहुंच गए।
मोथला उर्फ नीम वाली वन क्षेत्र में रफी अपने परिवार के साथ डेरा बनाकर रहते हैं। रविवार सुबह करीब 8 बजे वह गाय-भैंस चराने के लिए जंगल की ओर जा रहे थे। इसी दौरान घात लगाकर बैठे तेंदुए ने अचानक उन पर हमला कर दिया। तेंदुए ने रफी को दबोच लिया। हमले के दौरान रफी ने बचाव के लिए शोर मचाना शुरू कर दिया। उसकी चीख सुनकर करीब 250 मीटर दूर डेरा में मौजूद उसके पिता गुलाम नबी तुरंत डंडा लेकर घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े।
मौके पर पहुंचने पर गुलाम नबी ने देखा कि तेंदुए उनके बेटे पर हमला कर रहा है। उन्होंने बिना डरे डंडे से तेंदुए पर हमला करना शुरू कर दिया। तेंदुए ने कई बार घुर्राकर उन्हें डराने की कोशिश की, लेकिन बुजुर्ग पिता पीछे नहीं हटे। गुलाम नबी लगातार तेंदुए पर डंडे बरसाते रहे। करीब 5 मिनट तक दोनों के बीच संघर्ष चलता रहा। आखिरकार तेंदुए ने रफी को छोड़ दिया और जंगल की ओर भाग गया।
तेंदुए के हमले में रफी के हाथ और कंधे पर पंजों के निशान आए हैं। चोटों से खून निकलता देख परिजनों और ग्रामीणों ने तत्काल ग्राम प्रधान के पति नरवेल सिंह को घटना की जानकारी दी। इसके बाद घायल रफी को इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) ले जाया गया। वहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे घर भेज दिया गया।
रफी ने बताया कि अगर उसके पिता समय पर मौके पर नहीं पहुंचते तो उसकी जान बचना मुश्किल था। उसने कहा कि गुलाम नबी ने अपनी जान की परवाह किए बिना तेंदुए का सामना किया और लगातार डंडे से हमला कर उसे पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। घटना के बाद इलाके में बुजुर्ग पिता के साहस की चर्चा हो रही है। वहीं, तेंदुए के हमले से आसपास के ग्रामीणों में दहशत भी बनी हुई है।
घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची। क्षेत्रीय वन अधिकारी विकास कुमार और वन दरोगा मोहित कुमार ने घटनास्थल का जायजा लिया और ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी। वन विभाग के अधिकारियों ने जंगल क्षेत्र में रहने वाले लोगों को सावधानी बरतने के लिए कहा है।
वन दरोगा मोहित कुमार ने बताया कि इस क्षेत्र में वन गुर्जर जंगल में डेरा बनाकर रहते हैं और पशुपालन करते हैं। विभाग की ओर से उन्हें कई बार जंगल में न रहने की सलाह दी जा चुकी है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में पिंजड़ा लगाना संभव नहीं है। ऐसे में ग्रामीणों को सतर्क रहने और जंगल में जाते समय विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
घटना के दौरान तेंदुआ अपने शिकार रफी को छोड़ने के लिए तैयार नहीं था। दूसरी ओर, गुलाम नबी बेटे की जान बचाने के लिए लगातार उससे भिड़ते रहे। करीब 5 मिनट तक चले संघर्ष के बाद तेंदुए ने आखिरकार रफी को छोड़ दिया और जंगल की तरफ भाग गया। इसके बाद गुलाम नबी ने घायल बेटे को संभाला और परिजनों की मदद से उसे इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया।
Updated on:
17 Aug 2026 01:19 pm
Published on:
17 Aug 2026 01:19 pm
