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बीकानेर- अस्सी लाख की ठगी कर भागे व्यक्ति को तमिलनाडु से पकड़ा, फर्जी कंपनी बनाकर किया था घपला

सात साल पहले लाखों की ठगी कर भागे व्यक्ति को नाल पुलिस तमिलनाड़ु से गिरफ्तार कर बीकानेर लाई है।
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बीकानेर

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dinesh kumar swami

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Updated: 1 Feb 2019, 11:23 AM IST

bikaner news

बीकानेर- अस्सी लाख की ठगी कर भागे व्यक्ति को तमिलनाडु से पकड़ा, फर्जी कंपनी बनाकर किया था घपला

बीकानेर. सात साल पहले लाखों की ठगी कर भागे व्यक्ति को नाल पुलिस तमिलनाड़ु से गिरफ्तार कर बीकानेर लाई है। फिलहाल आरोपी पुलिस रिमांड पर चल रहा है। पिछले सात साल से पुलिस आरोपी की तलाश कर रही थी। आरोपी के खिलाफ न्यायालय की ओर से वारंट जारी हो रखा था।सीआइ धरम पूनिया ने बताया कि तमिलनाडु के मनारगुड़ी निवासी टीआर रवि पुत्र राजरतनम को गिरफ्तार किया गया। आरोपी को पांच दिन पहले बीकानेर लाया गया। बाद में उसे न्यायालय में पेश कर सात दिन के रिमांड पर लिया गया। सीआइ ने बताया कि धोखाधड़ी के आरोपी को पकडऩे के लिए छह दिन पूर्व नाल थाने से पुलिस टीम मनारगुड़ी भेजी गई। स्थानीय पुलिस की मदद से आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपी के खिलाफ न्यायालय की ओर से वारंट भी जारी हो रखा था।

यह है मामला
नाल बड़ी निवासी अशोक कुमार राठी की रविन्द्रसिंह एंड कंपनी नाम से एक फर्म है जो बरसिंहसर व नेवेयली लिग्नाइट परियोजना में काम करती है। उनकी कंपनी में तमिलनाड़ु के मनारगुड़ी निवासी टीआर रवि पुत्र राजरतनम काम करता था। आरोपी ने जालसाजी करके अपनी पत्नी रेखिना माला, भाई टीआर सुरेश एवं कविता के साथ मिलकर रविन्द्र सिंह एंड कंपनी नाम से फर्जी कंपनी बना ली, फर्जी पेन कार्ड बना लिया और बैंक खाता खुलवा लिया। आरोपी ने नेवेयली लिग्नाइट में अधिकारियों को फर्जी दस्तावेजों से बनाई नई कंपनी के नए खाता नंबर और पेन नंबर देकर ८० लाख का भुगतान करवा लिया। बाद में यहां से फरार हो गया।

कंपनी से पता चला धोखाधड़ी कापरिवादी अशोक का बरसिंहसर व लिग्नाइट परियोजना में सात-आठ करोड़ का प्रोजेक्ट चल रहा था। ऐसे में धोखाधड़ी का उन्हें नेवेयली परियोजना से ही पता चला। जब उनके कार्य के भुगतान में ८० लाख का अंतर आया तो उन्होंने कंपनी के अधिकारियों संपर्क साधा। तब उन्हें बताया गया कि आपने कंपनी व खाता बदल लिया, इसकी लिखित सूचना दी थी। कंपनी ने नए खाते में ८० लाख का भुगतान डलवा दिया।


गंगाशहर थाना ने माना गैर इलाका, नाल ने माना आरोपी
यह मामला दर्ज होने के बाद इसकी जांच गंगाशहर थाना पुलिस को सौंपी गई, तब गंगाशहर पुलिस ने गैर इलाका माना। इस पर इस मामले की जांच पुलिस निरीक्षक धरम पूनिया को सौंपी गई। तफ्तीश में धोखाधड़ी होना पाया गया। जांच अधिकारी पूनिया ने संबंधित रिकॉर्ड लिया। जांच में यह भी पता चला कि रविन्द्र सिंह एंड कंपनी स्थानीय कंपनी है जबकि नई बनी कंपनी फर्जी है।