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भाजपा प्रदेशाध्यक्ष व विधायक अशोक परनामी पार्क उजाड़कर दूसरे काम में लेने के अपने 'बड़े बोल' पर चौरतरफा घिर गए हैं। प्रबुद्धजन, राजनेताआें और आमलोगों को कहना है कि परनामी को तुरंत पार्टी प्रदेशाध्यक्ष और विधायक पद से इस्तीफा देना चाहिए। प्रदेशाध्यक्ष का बयान पार्टी और सरकार की मानसिकता को उजागर करता है।
उन्हें अपनी मानसिकता बदलनी चाहिए। प्रतिक्रिया में कहा गया है कि सरकार खुद कानून का हवाला देकर लोगों को उजाड़ देती है। फिर वही सरकार और उसके नुमाइंदे इस तरह के बयान देकर वोटबैंक की राजनीति कर रहे हैं।
इसी तरह कुछ लोगों का कहना है कि परनामी खुद को सबसे ऊपर समझने लगे हैं। यह तानाशाही रवैया है, जो लोकतंत्र में शोभा नहीं देता। वहीं प्रबुद्धजनों ने भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से परनामी पर कार्रवाई की उम्मीद भी जताई है।
कानून तोड़ रहे हैं
सरकार नए पट्टे दे नहीं रही। कानून के नाम पर अतिक्रमण हटाने का नाटक कर बीकानेर में गरीबों को उजाड़ा गया। एक तरह कानून के नाम पर चौकियां, चबूतरे और मकान तोड़ते हैं, दूसरी तरफ उसकी कानून की खुद धज्जियां उड़ाते हैं। परनामी का कानून तोडऩे के लिए उकसाने वाला बयान निंदनीय है।
यशपाल गहलोत, शहर जिलाध्यक्ष, कांग्रेस बीकानेर
तानाशाही राज
परनामी का बयान तानाशाही राज की मानसिकता को उजागर करता है। इस तरह के बयान देकर कोर्ट के आदेशों का मजाक उड़ाया जा रहा है, जबकि जनप्रतिनिधि और सत्ताधारी पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष से तो एेसे कानून का सम्मान करने की ही उम्मीद की जाती है। परनामी को इस्तीफा देना चाहिए।
अशोक बुडिया, छात्रसंघ अध्यक्ष, राजकीय डूंगर कॉलेज बीकानेर
कानून की अवहेलना
पत्रिका में प्रकाशित दो टूक 'अब तक आजाद कैसे' से साबित होता है कि पत्रिका एक सच्ची और निर्भीक पत्रकारिता कर रहा है। परनामी जनता के चुने हुए प्रतिनिधि व राज्य के सत्तारूढ़ दल के मुखिया भी हैं। परनामी का 'बार-बार आंखें बंद कर लेंगे' कहना न्यायपालिका के आदेशों की खुलेआम अवहेलना है।
अधिवक्ता अजय कुमार पुरोहित, पूर्व अध्यक्ष, बार संघ बीकानेर
पार्टी शीर्ष कार्रवाई करें
उच्च न्यायालय के आदेशों की पालना करना सभी का कर्तव्य है। सत्ताधारी दल के अध्यक्ष या जनता के चुने हुए नुमाइंदे ही पालना नहीं करेंगे तो यह अव्यवस्था का सिम्बल है। यह भाजपा प्रदेशाध्यक्ष परनामी का व्यक्तिगत मत है। एेसे में पार्टी शीर्ष को कार्रवाई करनी चाहिए।
शैलेश गुप्ता, वरिष्ठ अधिवक्ता
कानून का राज हो
प्रदेश में कानून व्यवस्था का राज होना चाहिए। चाहे निर्माण हो या नियमन, सभी नियम-कानून की तय प्रक्रिया से ही होने चाहिए। कोई जनप्रतिनिधि इसकी अवहेलना करता है अथवा करने की कहता है, तो यह गलत है। एेसी परम्परा की शुरुआत नहीं करनी चाहिए।
शशि शर्मा, बीकानेर
Published on:
22 Nov 2017, 1:13 PM IST
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