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दोहरे आदेशोंंसे असमंजस, वेतन पंचायत राज विभाग से, हाजिरी स्कूलों में देनी होती है

अब ग्राम पंचायत सहायक पीईईओ से पिछली सेवा संतोषप्रद होने तथा उपस्थिति प्रमाणित करने के लिए चक्कर काट रहे हैं।
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दोहरे आदेशोंंसे असमंजस, वेतन पंचायत राज विभाग से, हाजिरी स्कूलों में देनी होती है

दोहरे आदेशोंंसे असमंजस, वेतन पंचायत राज विभाग से, हाजिरी स्कूलों में देनी होती है

बीकानेर. राज्य में कार्यरत करीब 23 हजार 400 ग्राम पंचायत सहायक सरकार के दोहरे आदेशों के बीच फंस कर रह गए हैं। सरकार ने अब इनकी आगामी वर्ष की सेवा वृद्धि प्रधानाचार्य एवं पदेन पंचायत प्रारंभिक शिक्षा अधिकारियों से पिछले वर्ष की सेवा संतोषप्रद होने तथा उपस्थिति प्रमाणीकरण होने पर ही किए जाने के आदेश जारी किए हैं। जबकि इनमे से कई कोविड काल से सरपंचों के अधीन ग्राम पंचायत कार्यालयों में उपस्थिति दे रहे हैं। ऐसे में अब ग्राम पंचायत सहायक पीईईओ से पिछली सेवा संतोषप्रद होने तथा उपस्थिति प्रमाणित करने के लिए चक्कर काट रहे हैं।

पीईईओ का कहना है कि जो ग्राम पंचायत सहायक स्कूलों में उपस्थिति ही नहीं दे रहे, वे उनकी सेवा संतोषप्रद होने तथा उपस्थिति प्रमाणीकरण किस आधार पर करें, जबकि पंचायती राज विभाग तथा प्रारंभिक शिक्षा विभाग के स्पष्ट आदेश हैं कि इन्हे पीईईओ के कार्यों में सहयोग के लिए लगाया गया है तथा इन्हें अपनी उपस्थिति पीईईओ कार्यालयों में देनी है। उधर ग्राम पंचायत सहायक किंकर्तव्यविमूढ की स्थिति में हैं। अगर वे सरपंचों के आदेश नहीं मानें, तो उनके वेतन के लाले पड़ जाएं और वे पीईईओ के कार्यालय में उपस्थित नहीं हों, तो सेवा वृद्धि के लिए तरस जाएं।

वैसे सरकार के अन्य विभागों में जहां वेतन वहां काम के निर्देश है, लेकिन पहली बार सरकार ने ग्राम पंचायत सहायकों के वेतन और कार्य करने के अलग अलग विभाग निर्धारित करके इन ग्राम पंचायत सहायकों को दुधारी तलवार पर चलने की स्थिति में ला खड़ा किया है। एक तरफ वेतन के लिए उन्हें सरपंचों की जी हजूरी करनी पड़ रही है, तो दूसरी तरफ निरंतर सेवा जारी रखने के लिए पीईईओ से हाथाजोडी करनी पड़ रही है। राजस्थान शिक्षक संघ अरस्तू के प्रदेशाध्यक्ष रामकृष्ण अग्रवाल ने सरकार से ऐसे दोहरे आदेश वापस लेकर इन ग्राम पंचायत सहायकों को एक विभाग के अधीन ही करने की मांग की है।

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