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बीकानेर में गुमशुदगी के चौंकाने वाले आंकड़े: दो साल आठ माह में 1925 महिलाएं और युवतियां लापता

Bikaner Missing Women: बीकानेर में दो साल आठ माह में 1925 महिलाओं और युवतियों की गुमशुदगी दर्ज हुई। इनमें 1695 वापस मिल चुकी हैं, जबकि 230 का अब तक पता नहीं चल पाया है। पुलिस के सामने गुमशुदा लोगों की तलाश की चुनौती बनी हुई है।
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बीकानेर

•

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Harshita Saini

•

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जयप्रकाश गहलोत

•

Oct 03, 2026

Bikaner Missing Women

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जयप्रकाश गहलोत

बीकानेर. किसी मां की नजर दरवाजे पर टिकी है…। किसी पिता को फोन पर उस घंटी का पत्रिका इंतजार। किसी भाई को उम्मीद है कि बहन एक दिन अचानक लौट आएगी। बीकानेर में गुमशुदगी के आंकड़ों के पीछे ऐसे ही परिवारों का लंबा इंतजार छिपा है। पिछले दो साल आठ माह में जिले में 302 युवतियों और 1623 महिलाओं की गुमशुदगी दर्ज हुई। इनमें 298 युवतियां और 1397 महिलाएं वापस मिल चुकी है, जबकि 231 का अब तक पता नहीं चल पाया है। ये आंकड़े सिर्फ थानों में दर्ज गुमशुदगी के मामले नहीं है। इनके पीछे उन परिवारों की बेचैनी और अनिश्चितता है, जिनके घर से कोई सदस्य अचानक चला गया।

2026 में 107 महिलाएं अब भी लापता

वर्ष 2024 में 559 महिलाएं लापता हुई। इनमें 508 वापस मिल गई और 51 का अब तक पता नहीं चला। वर्ष 2025 में 619 महिलाओं की गुमशुदगी दर्ज हुई, जिनमें 551 वापस मिलीं और 68 अब भी लापता है। वर्ष 2026 में अगस्त तक 445 महिलाएं गुमशुदा दर्ज हुई। इनमें 338 वापस मिल चुकी है, जबकि 107 का अभी तक पता नहीं चला है। यह संख्या 2024 और 2025 के पूरे वर्ष में लंबित रहे मामलों से अधिक है।

युवतियों की 302 गुमशुदगियां, ज्यादातर मिल गई

युवतियों के मामलों में वर्ष 2024 में 106 गुमशुदगी दर्ज हुई, जिनमें 105 वापस मिल गई और एक का पता नहीं चला। वर्ष 2025 में 107 युवतियां लापता हुई और सभी वापस मिल गई। वर्ष 2026 में अगस्त तक 89 युवतियों की गुमशुदगी दर्ज हुई है। इनमें 86 के
वापस मिलने की जानकारी है।

1925 गुमशुदगियां, कई सवाल अनुत्तरित

पिछले दो साल आठ माह में दर्ज 1925 गुमशुदगियों में 302 युवतियां और 1623 महिलाएं शामिल हैं। यानी दर्ज मामलों में महिलाओं की संख्या युवतियों की तुलना में काफी अधिक हैं। ये आंकड़े परिवार और समाज के कौन-सी परिस्थितियां बन रही है, जिनमें महिलाएं और युवतियां घर से दूर जाने का फैसला कर रही है? क्या पारिवारिक संवाद की कमी, सामाजिक दबाव, रिश्तों में तनाव या अन्य परिस्थितियां इन मामलों में भूमिका निभा रही है?

पुलिस की चुनौती सिर्फ तलाश तक सीमित नहीं

पुलिस अधीक्षक मृदुल कच्छावा के अनुसार, गुमशुदगी के मामले चिंतनीय है। पुलिस कानून के दायरे में रहते हुए परिवार से समन्वय कर गुमशुदा लोगों की तलाश के प्रयास करती है और काफी मामलों में सफलता भी मिलती है। कुछ मामलों में सफलता नहीं मिल पाती। उन्होंने कहा कि युवतियों और महिलाओं के घर से जाने की वजहों को समझने के लिए समाज और परिवार को भी मिलकर चिंतन करना होगा।

तीन साल के आंकड़े

वर्षयुवतियां लापतावापस मिलींपता नहींमहिलाएं लापतावापस मिलींपता नहीं
2024106105155950851
2025107107061955168
202689863445338107
कुल302298416231397226

हर गुमशुदगी की कहानी एक जैसी नहीं

पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज गुमशुदगी के पीछे अलग-अलग परिस्थितियां सामने आती हैं। कुछ मामलों में युवक-युवती बिना बताए घर से चले जाते हैं, तो कुछ में पारिवारिक विवाद, प्रेम संबंध या विवाह को लेकर मतभेद कारण बनते हैं। महिलाओं की गुमशुदगी में भी परिस्थितियां अलग-अलग रहती हैं। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, कुछ मामलों में महिलाएं और युवतियां प्रेम संबंध या किसी के बहकावे में आकर घर से चली जाती हैं। बाद में परिस्थितियां उनके लिए कठिन हो जाती हैं। ऐसे मामलों में वापस आने के बाद परिवार और सामाजिक रिश्तों के स्तर पर भी कई तरह की चुनौतियां सामने आती हैं। हालांकि गुमशुदगी के आंकड़ों का दूसरा पहलू यह भी है कि बड़ी संख्या में महिलाएं और युवतियां पुलिस तलाश के बाद वापस मिल जाती हैं। लेकिन जिनका पता नहीं चलता, उनके परिवारों के लिए इंतजार खत्म नहीं होता।