
चीता उर्फ डोगर, अली खां और बिल्ला (फोटो पत्रिका नेटवर्क)
-जयप्रकाश गहलोत
Rajasthan Drugs Trafficking: बीकानेर: ड्रोन से आने वाले नशे और हथियार की डोर पाकिस्तान तक जुड़ गई है। सरहद पार मौत का सामान भेजने वाले पाकिस्तान के तीन लोगों की पुलिस ने पहचान कर ली है। पुलिस ने तीनों को एफआईआर में नामजद भी कर लिया है। पुलिस अब तीनों के खिलाफ न्यायालय में चार्जशीट पेश करने के साथ अंतरराष्ट्रीय मंच पर इस मुद्दे को रखने की तैयारी में है। हाल के वर्षों में प्रदेश का यह पहला मामला है, जिसमें पाकिस्तान के नागरिकों को नामजद किया गया है। नामजद पाकिस्तानी नागरिक फोर्ट अब्बास निवासी चीता उर्फ डोगर, बहावलपुर निवासी अली खां और बहावलपुर निवासी बिल्ला खान हैं।
बीकानेर पुलिस को गत 22 अप्रैल को पूगल थाना क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हुई स्कूटी में 13 किलो 476 ग्राम हेरोइन मिली थी। इस मामले की जांच में खेताराम और राकेश प्रजापत का नाम सामने आया। जांच में मामले की कड़ियां पंजाब की जेल से जुड़ गईं। इसी दौरान खाजूवाला थाना क्षेत्र में भी 10 किलो हेरोइन और 11 हथियार मिले। पुलिस की जांच में स्थानीय रिसीवर वीरेंद्र राजपुरोहित, स्थानीय हैंडलर राकेश प्रजापत और पंजाब की जेल में बैठे नेटवर्क से जुड़े विक्की उर्फ विक्रम की भूमिका भी सामने आई है।
पुलिस की जांच में सामने आया कि यह नेटवर्क कई स्तरों पर काम कर रहा था। पाकिस्तान में बैठे हैंडलर और ड्रोन ऑपरेटर सीमा पार से खेप भेजते थे। पंजाब की जेलों में बंद अपराधी स्थानीय युवाओं को नेटवर्क से जोड़ने और संपर्क स्थापित कराने में भूमिका निभाते थे। इसके बाद राजस्थान के स्थानीय हैंडलर और फुट सोल्जर ड्रोन से गिराई गई खेप उठाते थे।
गहरी निगरानी के बाद पुलिस रिसीवर तक पहुंची और वीरेंद्र राजपुरोहित को गिरफ्तार किया। जांच में पहली बार सीमा पार बैठे चिता उर्फ डोगर, अली और बिल्ला का नाम सामने आया। ऑपरेशन शॉकवेव में इन तीन पाकिस्तानी नागरिकों को नामजद किया गया। इनकी भूमिका ड्रोन ड्रॉपिंग नेटवर्क से जुड़ी पाई गई है। इससे जांच का दायरा सीमा पर ड्रोन से गिराए गए पैकेट को उठाने वाले व्यक्ति से आगे बढ़कर खेप भेजने वाले सीमा पार नेटवर्क तक पहुंच गया है।
ऑपरेशन के बाद पुलिस ने ड्रोन आधारित नशा और हथियार तस्करी से जुड़े 80 से अधिक लोगों को अलग-अलग श्रेणियों में चिन्हित किया है। इनमें पुराने मामलों के आरोपी, चार्जशीट हो चुके व्यक्ति, जेल से बाहर आए आरोपी और जमानत पर छूटे लोग शामिल हैं। पुलिस अब इनके संपर्कों, आवाजाही और सीमा क्षेत्र में गतिविधियों पर नजर रख रही है।
ऑपरेशन शॉकवेव की जांच ने तस्करी के उस मॉडल को सामने रखा है, जिसमें ड्रोन सिर्फ माध्यम है और उसके पीछे पूरा नेटवर्क काम करता है। पाकिस्तान में बैठे हैंडलर से लेकर पंजाब की जेलों में बंद अपराधियों और राजस्थान के फुट सोल्जर्स तक कड़ियां जुड़ी होने की बात जांच में सामने आई है।
“जांच में पाकिस्तान स्थित हैंडलरों, पंजाब की जेलों में सक्रिय आपराधिक नेटवर्क और स्थानीय अपराधियों के बीच संगठित कड़ियां सामने आई हैं। पुलिस ने पाकिस्तान के तीन लोगों को मामले में नामजद किया है। पुलिस का फोकस केवल ड्रोन से आने वाली खेप पकड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे नेटवर्क की पहचान कर उसकी जड़ तक पहुंचने और उसे तोड़ने पर है।”
-मृदुल कच्छावा, पुलिस अधीक्षक, बीकानेर
Updated on:
01 Oct 2026 08:13 am
Published on:
01 Oct 2026 08:13 am
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
