2 नवंबर 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

भारत में दशकों पूर्व खरीदी गई मशीनें अब कबाड़ के भाव होंगी नीलाम, देखिये वीडियो

बीकानेर रियासत में खरीदी गई मशीनों के साथ स्वतंत्र भारत में दशकों पूर्व खरीदी गई मशीनें अब कबाड़ के भाव नीलाम होंगी।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

बीकानेर

•

image

dinesh kumar swami

•

Updated: 6 May 2018, 10:54 AM IST

Government press

राजकीय मुद्रणालय

बीकानेर . बीकानेर मुद्रणालय का इतिहास अब मिटने के कगार पर है। बीकानेर रियासत में खरीदी गई मशीनों के साथ स्वतंत्र भारत में दशकों पूर्व खरीदी गई मशीनें अब कबाड़ के भाव नीलाम होंगी। इसकी तैयारी हो गई है। बीकानेर मुद्रणालय में स्थापित करीब दो दर्जन प्रिंटिंग मशीनों को नीलाम करने, सात मशीनें जयपुर और जोधपुर भेजने तथा 6 मशीनें अभिलेखागार विभाग को देने की तैयारी हो गई है। मशीनों के नीलाम होने और बाहर भेजने जाने के साथ ही रियासतकाल से चला आ रहा मुद्रणालय का इतिहास भी कागजों में सिमट जाएगा। मुद्रणालय का भवन भी अभिलेखागार विभाग को हस्तांतरित होने वाला है।

दुर्लभ एवं स्वर्णिम
रियासतकाल में खरीदी गई कई मशीनें अब दुर्लभ और ऐतिहासिक हैं। इन मशीनों का इतिहास स्वर्णिम रहा है। मुद्रणालय कार्मिकों की मानें तो ये मशीनें आज भी चालू स्थिति में है। इनमें कुछ मशीनें इंग्लैंड और रूस में बनी हुई हैं। देश की आजादी के बाद पचास और साठ के दशक में खरीदी गई मशीनें भी आज दशकों बाद उस दौर की प्रगति का प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। तात्कालीन दौर में उपयोगी रही ये मशीनें आज लोकशाही के दौर में अनुपयोगी हो गई हैं और कबाड़ घोषित होकर बिकने की तैयारी में हैं।

131 वर्ष का इतिहास
मुद्रणालय का बीकानेर में इतिहास करीब 131 वर्ष पुराना है। बीकानेर रियासत में साल 1887 में पहली बार गवर्नमेंट प्रेस की स्थापना सेन्ट्रल जेल में हुई। इसके बाद यह प्रेस गढ़ में मंगल बुर्ज में स्थानान्तरित हो गई। वर्तमान में जिस स्थान पर राजकीय मुद्रणालय है, उस भवन का निर्माण साल 1932 में हुआ और प्रेस यहां स्थानान्तरित हो गई।

केन्द्रीय मंत्री से गुहार
बीकानेर राजकीय मुद्रणालय के बंद होने की कवायद को रुकवाने और इतिहास को बचाने की शनिवार को प्रेम रतन जोशी के नेतृत्व में मुद्रणालय कार्मिकों ने केन्द्रीय राज्यमंत्री अर्जुनराम मेघवाल से गुहार की गई। उन्होंने मंत्री को बताया कि मुद्रणालय में कार्यरत अधिकतर कार्मिक प्रतिनियुक्त, स्थानान्तरित किए जा चुके है।

सरकार बीकानेर प्रेस को बंद करने पर उतारू है। मंत्री मेघवाल ने उन्हें आश्वासन दिया कि वे शीघ्र ही मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से बात कर इस मामले का रिव्यू करने और प्रेस को बंद नहीं करने की बात करेंगे। इस दौरान उमेश बिस्सा, भूपेश पारीक, नरेन्द्र टाक, अविनाश जोशी आदि उपस्थित थे।