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पुरुषोत्तम मास समाप्त, सूने पड़े विवाह स्थलों पर फिर से लौटेगी रौनक

भगवान विष्णु की आराधना के पुरुषोत्तम मास का समापन बुधवार हो गया। इसके साथ ही विवाह आदि मांगलिक कार्यक्रमों की शुरुआत होगी।
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बीकानेर

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dinesh kumar swami

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Updated: 14 Jun 2018, 8:32 AM IST

 marriage season

Purushottam Mass ended

बीकानेर. भगवान विष्णु की आराधना के पुरुषोत्तम मास का समापन बुधवार हो गया। इसके साथ ही विवाह आदि मांगलिक कार्यक्रमों की शुरुआत होगी। पुरुषोत्तम मास में सूने पडे़ विवाह स्थलों पर फिर से रौनक लौटेगी। शादियों के लिए हलवाई, भवन, कैटरिंग, टेन्ट, डेकारेशन, बैण्ड आदि की बुकिंग हो चुकी है।

ज्योतिषाचार्य पंडित राजेन्द्र किराडू ने बताया कि पुरुषोत्तम मास के बाद अब जून और जुलाई माह में सावे होंगे। अगले माह २३ जुलाई को देवशयनी एकादशी तक शादी-विवाह आदि मांगलिक कार्यों का दौर चलेगा। इसके बाद चातुर्मास शुरू हो जाएगा। फिर चार माह तक मांगलिक कार्य नहीं होंगे।

शादियों की रहेगी धूम
शहर में जून और जुलाई में शादियों की धूम रहेगी। बड़ी संख्या में शादी-विवाह और मांगलिक कार्य होंगे। पं. किराडू ने बताया कि जून में २०, २१, २२, २३, २५ और २९ जून को तथा जुलाई में ५, ६, १० में अधिक सावे होंगे। शुद्ध नवमी २१ जुलाई को अबूझ सावे पर शादी-विवाह मांगलिक कार्यक्रम होंगे।

घर-घर अनुष्ठान, हुए दान-पुण्य
बीकानेर. पुरुषोतम मास की पूर्णाहुति और अमावस्या पर बुधवार को शहर में धार्मिक अनुष्ठान हुए। श्रद्धालु लोगों ने दान-पुण्य कर हवन में आहूतियां दी। कई स्थानों पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा की पूर्णाहुति हुई। जगह-जगह गायों को गुड़ व चारा खिलाया गया व जरूरतमंद लोगों को भोजन और वस्त्र आदि सामग्रियों का दान किया गया।

मंदिरों में दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं की लम्बी कतारें रही। मंदिरों में मटकी, प्रसाद और मालपुआ अर्पित किए गए। गोशालाओं में गायों को हरा चारा खिलाया गया। घरों में हवन में आहूतियां देने के साथ भजनों के गायन हुए। बीकानेर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु श्रीकोलायत स्थित कपिल सरोवर में स्नान करने और दान-पुण्य के लिए पहुंचे।

'स्वार्थपरक नहीं हो मित्रताÓ
बीकानेर. पारीक चौक स्थित मां कृपालय भवन में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में बुधवार को कथावाचक बाल संत छैलबिहारी महाराज ने कहा कि जीवात्मा जीवन में अपनी गलतियों को गुरु माने तो जीवन में मर्यादा, शालीनता और संस्कारों में बढ़ोतरी होती है। उन्होंने कहा कि गलतियां हमें जीना सिखाती हैं।

सुदामा प्रसंग में कहा कि मित्रता स्वार्थपरक नहीं होनी चाहिए। कथा वाचन के दौरान नव योगेश्वर संवाद, २४ गुरुओं की कथा, सुखदेव गमन, परीक्षित मोक्ष आदि कथाओं की व्याख्या की। राधा-कृष्ण, कृष्ण-रुक्मणी की झांकिया सजाई गई। मानव धर्म प्रसार सेवा संस्थान की ओर से आयोजित कथा से पूर्व कृपालय सत्संग भवन से भागवत सप्ताह शोभायात्रा निकाली गई।