इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को ऐतिहासिक, भौगोलिक, सांस्कृतिक, प्राकृतिक धरोहरों से परिचित कराना है, ताकि उनका मानसिक विकास हो सके। साथ ही वे उन ऐतिहासिक साक्ष्यों का प्रत्यक्ष साक्षात्कार भी कर पाएं, जिन्हें उन्होंने अब तक किताबों में ही पढ़ा-देखा है।